MP: गर्म कपड़े पहनाकर बैंड-बाजे के साथ निकाली बंदर की शव यात्रा, महिलाओं ने गाए भजन

राजगढ़ में बंदर की मौत पर मातम पसर गया. गांव के लोगों ने पूरे विधि विधान और बैंड-बाजे के साथ उसकी अंतिम यात्रा निकाली. बंदर की शव यात्रा के पीछे पीछे गांव की महिलाएं भजन गाती हुईं मुक्तिधाम तक गईं. जहां जहां से शव यात्रा निकली वैसे वैसे लोग जुड़ते चले गए.

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 बैंड बाजे के साथ निकाली बंदर की शव यात्रा बैंड बाजे के साथ निकाली बंदर की शव यात्रा

पंकज शर्मा

  • राजगढ़,
  • 31 दिसंबर 2021,
  • अपडेटेड 9:54 PM IST
  • बैंड-बाजे से साथ निकली बंदर की शव यात्रा
  • बंदर को गर्म कपड़े पहनाकर दी अंतिम विदाई

मध्य प्रदेश के राजगढ़ में बंदर की मौत पर मातम पसर गया. गांव के लोगों ने पूरे विधि विधान और बैंड -बाजे के साथ उसकी अंतिम यात्रा निकाली. ग्रामीणों का कहना है कि ठंड से कांपते हुए बंदर उनके आया और आग के पास आकर बैठ गया. फिर अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई तुरंत ही उसे इलाज के लिए डॉक्टर के पास ले जाया गया. लेकिन बुधवार को उसकी मौत हो गई. बंदर की मौत से गांव के लोग गम में डूब गए. 

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बंदर की मौत से गांव में पसरा मातम 

ग्रामीणों ने बताया कि डॉक्टर ने बंदर को इंजेक्शन लगाया और कहा कि इसे गांव ले जाओ, कुछ देर बाद आराम आ जाएगा. फिर हम सब उसे गांव ले आए. लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं आया और देर रात 2 बजे बंदर की मौत हो गई. बंदर की देखरेख में जुटे लोग भावुक हो गए. फिर सुबह सभी गांव वालों ने बंदर की अंतिम यात्रा निकाली. गांव वाले बंदर को हनुमान जी का अवतार मानते हैं. इसलिए सभी गांव के लोग इकट्ठा हुए और सबने मिलकर उसका अंतिम संस्कार किया.

बैंड बाजे के साथ निकाली बंदर की शव यात्रा

गांव वालों ने मिलकर बंदर की शव यात्रा निकाली

बंदर की मौत के बाद गांव के लोग भावुक हो गए, फिर धूमधाम के साथ उसकी शव यात्रा निकाली. धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उसका अंतिम संस्कार किया गया. डालूपुरा गांव के बिरम सिंह चौहान ने बताया कि बंदर को हनुमान जी का स्वरूप माना जाता है, इसलिए ऐसा किया गया. बंदर के लिए अर्थी सजाई गई और लोगों ने नारियल रखकर बंदर को नमन किया गया. इसके बाद अंतिम यात्रा मुक्तिधाम के लिए रवाना हुई.

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शव यात्रा के पीछे महिलाएं भजन गाती हुई गईं

बंदर की शव यात्रा के पीछे पीछे गांव की महिलाएं भजन गाती हुईं मुक्तिधाम तक गईं. जहां जहां से शव यात्रा निकली, वैसे-वैसे लोग जुड़ते चले गए. बंदर को गर्म कपड़े पहनाए गए थे. फिर पूरे विधि-विधान से बंदर का अंतिम संस्कार किया गया. 

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