मध्य प्रदेश में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव 2018 के बाद मतगणना पूरी हो चुकी है. प्रदेश की बुधनी विधानसभा सीट से सूबे के सीएम शिवराज ने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को शिकस्त दी है. इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को 64493 वोट और सीएम शिवराज को 123492 वोट मिले हैं.
कांग्रेस ने बीजेपी के सबसे बड़े चेहरे और सत्ता के सिंहासन पर काबिज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उनके ही गढ़ में घेरने की रणनीति के तहत अरुण यादव को बुधनी सीट से उम्मीदवार बनाया था. अरुण यादव राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे सुभाष यादव के बड़े बेटे हैं. अरुण यादव कभी विधानसभा के सदस्य नहीं रहे, लेकिन दो बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं और मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं.
कमलनाथ को प्रदेश कांग्रेस की कमान दिए जाने के बाद अरुण यादव ने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था जिसके बाद कांग्रेस उन्हें उनके ही जिले खरगौन से पहले चुनाव लड़ाना चाहती थी, लेकिन वो राजी नहीं हुए है. इसके बाद कांग्रेस की आखिरी लिस्ट में अरुण यादव को बुधनी से उम्मीदवार के तौर पर उतार दिया.
शिवराज की पारंपरिक सीट है बुधनी
बुधनी सीट से पांचवीं बार चुनावी मैदान में उतरे शिवराज ने 2013 में कांग्रेस उम्मीदवार महेंद्र सिंह चौहान को करीब 84 हजार वोटों से हराया था. इस बार पर्चा दाखिल करने के बाद उन्होंने कहा था कि अब वे यहां नहीं आएंगे, क्योंकि उनके ऊपर प्रदेश की 229 और दूसरी सीटों की भी जिम्मेदारी है. इस सीट पर आप लोगों को विजयश्री दिलानी है.
बुधनी का सियासी इतिहास
बुधनी से शिवराज सिंह ने पहला चुनाव 1990 में लड़ा था. इसके बाद 2005 उनके लिए बदलाव लेकर आया जब उन्हें मध्य प्रदेश में बाबूलाल गौर को हटाकर मुख्यमंत्री बनाया गया. इसके बाद 2006 में अपनी पुरानी सीट बुधनी से उपचुनाव में कांग्रेस के राजकुमार पटेल को करीब 36 हजार मतों से हराकर विधानसभा के सदस्य बने.
इसके बाद चौहान ने लगातार 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव में बुधनी सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा. 2008 में उन्होंने कांग्रेस के महेश सिंह राजपूत को 41 हजार वोटों से परास्त किया जबकि 2013 में महेंद्र सिंह चौहान को 84 हजार मतों से हराया था.
MP में 2013 के चुनावी नतीजे
मध्य प्रदेश में कुल 231 विधानसभा सीटें हैं. 230 सीटों पर चुनाव होते हैं जबकि एक सदस्य को मनोनीत किया जाता है. 2013 के चुनाव में बीजेपी को 165, कांग्रेस को 58, बसपा को 4 और अन्य को तीन सीटें मिली थीं.
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