देवघर को लोग मनोकामनाओं की नगरी कहते हैं. यहां आने वाला हर श्रद्धालु किसी न किसी उम्मीद के साथ बाबा बैद्यनाथ के दरबार में माथा टेकता है. देवघर में आस्था के साथ इंसानियत और ममता की एक ऐसी कहानी सामने आई, जिसने दिल छू लिया. स्पेन में रहने वाले कपल मिंग्रेल और मार्का जब देवघर पहुंचे, तो कोई नहीं जानता था कि उनकी यह यात्रा किसी बच्चे की पूरी दुनिया बदल देगी. यह कपल धार्मिक परंपराओं से खुद को ज्यादा नहीं जोड़ता, लेकिन देवघर की पवित्र धरती पर कदम रखते ही उनके जीवन की सबसे बड़ी मनोकामना पूरी होने वाली थी.
देवघर के शिशु गृह में एक नन्ही सी बच्ची थी... मासूम और अपनों के इंतजार में. जब मिंग्रेल और मार्का की नजर उस बच्ची पर पड़ी, तो मानो वक्त थम गया. बच्ची को गोद में लेते ही मार्का की आंखें भर आईं. वह पल उनके लिए सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं था, बल्कि एक अधूरी जिंदगी के पूरा होने का एहसास था. उन्होंने बच्ची को सीने से लगाया और देर तक निहारते रहे, जैसे बरसों से इसी पल का इंतजार कर रहे हों.
मार्का और मिंग्रेल ने भावुक स्वर में कहा कि आज हमारी फैमिली पूरी हो गई है. यह बच्ची हमारे लिए बाबा बैद्यनाथ और माता पार्वती का आशीर्वाद है. कपल का कहना है कि लंबे समय से उन्हें एक बच्चे की चाह थी. इस बच्ची के आने से उनकी जिंदगी में खुशियों ने दस्तक दी है. उनके अनुसार, अब उनकी फैमिली पूरी हो गई है और वे खुद को बेहद सौभाग्यशाली मानते हैं.
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इस भावुक कहानी के पीछे एक मजबूत और जिम्मेदार व्यवस्था भी थी. देवघर जिला प्रशासन की निगरानी में दत्तक ग्रहण की पूरी प्रक्रिया पूरी की गई.
उपायुक्त की अध्यक्षता में विशिष्ट दत्तक समिति की बैठक हुई, जिसमें हर दस्तावेज, हर नियम और हर पहलू की गहन जांच की गई. दत्तक ग्रहण विनियम 2022 के तहत केंद्रीय बाल कल्याण समिति के सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया गया. इसके बाद अंतिम आदेश जारी हुआ और बच्ची को एक सुरक्षित, स्नेहिल परिवार मिल गया.
जिला प्रशासन का कहना है कि यह सिर्फ एक दत्तक ग्रहण नहीं, बल्कि एक नई जिंदगी की शुरुआत है. प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि कोई अनाथ या परित्यक्त बच्चे को गोद लेना चाहता है, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे आए. इससे न सिर्फ बच्चों का भविष्य सुरक्षित होगा, बल्कि समाज में भी एक सकारात्मक संदेश जाएगा. मिंग्रेल और मार्का के चेहरे पर सुकून था. उनकी गोद में एक बच्ची थी, और आंखों में एक नया सपना. जहां एक अनाथ बच्ची को परिवार मिला, तो वहीं एक कपल के लिए यह जीवन की सबसे बड़ी खुशी थी.
शैलेन्द्र मिश्रा