कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन में जहां-तहां फंसे प्रवासी मजदूरों को अपने गृह राज्य वापस लाए जाने की प्रक्रिया अब जोर पकड़ रही है. श्रमिक स्पेशल ट्रेन के बाद अब विमान सेवाएं शुरू हो जाने के बाद मजदूरों की घर वापसी में विमानों का भी सहारा लिया जा रहा है.
मुंबई से एक एनजीओ के सहयोग से झारखंड के 177 प्रवासी मजदूर 28 मई को वापस अपने गृह राज्य पहुंचे थे. अब झारखंड सरकार लेह में फंसे 60 प्रवासी मजदूरों को एयरलिफ्ट करेगी. मजदूरों का यह दल स्पाइस जेट के विमान से 12 बजे लेह से दिल्ली के लिए उड़ान भरेगा.
बताया जाता है कि यह फ्लाइट लगभग 2 बजे दिल्ली पहुंचेगी. यहां से शाम 6 बजे रांची की फ्लाइट रवाना होगी, जिसके रात 8 बजे तक रांची पहुंचने की उम्मीद है. प्रवासी मजदूरों के रांची पहुंचने पर खुद मुख्यमंत्री के एयरपोर्ट पर मौजूद रहने की संभावना जताई जा रही है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद इस ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. मजदूरों के रांची एयरपोर्ट पहुंचने पर मुख्यमंत्री के खुद एयरपोर्ट पहुंचने की संभावना है. मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर मजदूरों को गृह राज्य वापस लाए जाने की जानकारी देते हुए सहयोग के लिए बीआरओ, केंद्र शासित प्रदेश लेह के प्रशासन और विमान कंपनियों को धन्यवाद दिया है.
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यहां से सभी श्रमिकों को उनके गृह जिले दुमका भेजा जाएगा. ये सभी मजदूर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की ओर से बटालिक-करगिल सेक्टर में कराए जा रहे सड़क निर्माण के एक प्रोजेक्ट में कार्य कर रहे थे. इन मजदूरों को बटालिक से विमान से रांची लाया जाएगा. इसके बाद इन्हें दुमका भेजा जाएगा. बताया जाता है कि इन मजदूरों ने ट्विटर के जरिए मुख्यमंत्री से घर वापसी में सहयोग मांगा था.
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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के प्रशासन से संपर्क कर सहयोग करने का आग्रह किया था और झारखंड कंट्रोल रूम ने मजदूरों का राज्य के पोर्टल और एप पर रजिस्ट्रेशन कराया. मुख्यमंत्री के निवेदन पर बीआरओ ने मजदूरों के लिए राशन का प्रबंध कराया. अब, जबकि विमानों की उड़ान शुरू हो गई है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित करने के लिए एक टीम बनाई.
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इसके सभी 60 मजदूरों को थर्मल स्क्रीनिंग के बाद बीआरओ ने सड़क मार्ग से 6 घंटे में कार्य स्थल से लेह लाया. मजदूरों की घर वापसी के इस ऑपरेशन की खुद मुख्यमंत्री मॉनिटरिंग कर रहे हैं. इस पर लगभग 8 लाख रुपये खर्च आने की उम्मीद जताई जा रही है. यह खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है.
सत्यजीत कुमार