लॉकडाउन: दादी 5 महीने के बच्चे को चावल का माड़ पिलाने के लिए मजबूर

देशभर में लॉकडाउन का असर सबसे ज्यादा गरीब और मजदूरों पर पड़ा है. कई परिवार ऐसे हैं जिनके पास दो वक्त का खाना तक नहीं है. झारखंड के लातेहार में एक परिवार के पास अपने पांच महीने के बच्चे को दूध पिलाने तक के पैसे नहीं है. जिसके चलते वो बच्चे को चावल का माड़ पिलाने के लिए मजबूर हैं.

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बच्चे को दूध की जगह चावल का माड़ पिलाने के लिए मजबूर है दादी (Photo Aajtak) बच्चे को दूध की जगह चावल का माड़ पिलाने के लिए मजबूर है दादी (Photo Aajtak)

संजीव कुमार गिरी

  • लातेहार,
  • 29 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 9:07 AM IST

  • लॉकडाउन ने बिगाड़ी आर्थिक स्थिति
  • बच्चे को चावल का माड़ पिलाना पड़ा

कोरोना वायरस को रोकने के लिए देशभर में लॉकडाउन किया गया है. लेकिन इसका सीधा प्रभाव देश के गरीब और मजदूर वर्ग पर पड़ रहा है. झारखंड के लातेहार से एक दर्दनाक खबर सामने आई है. जहां एक परिवार के पास दो वक्त का खाना नहीं है. जिस वजह से पांच महीने के बच्चे को उसकी दादी चावल का माड़ पिलाने के लिए मजबूर है.

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लातेहार जिला के महुवाडाड प्रखंड के परहाटोली की नगेशिया बस्ती में उपेंद्र नगेशिया की पांच माह के बच्चे मनीष की भूख चावल का माड़ पिलाकर मिटाई जा रही है. 65 साल की दादी बिगो नगेशिया को हर माह 13 किलो चावल मिलता है. जिससे वो अपना और अपने परिवार का पेट भरती है. बिगो नगेशिया की वृद्धा पेंशन पिछले एक साल से बंद है. जिसकी वजह से आर्थिक हालत पूरी तरह बिगड़ चुकी है और वो चावल के माड़ से बच्चे की भूख मिटाने को मजबूर हैं.

चावल का माड़ पीता बच्चा

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बिगो नगेशिया की बहू बच्चे को जन्म देने के एक सप्ताह के बाद बीमार पड़ गई थी. आर्थिक तंगी के चलते उसका ठीक से इलाज नहीं हो पाया था फिर उसकी मौत हो गई. ऐसे में परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. ऐसे में बिगो नगेशिया का बेटा उपेंद्र मुंबई जाकर काम करने लगा. लेकिन लॉकडाउन के चलते वो अपने घर नहीं आ पाया और बुजुर्ग मां को पैसे भी नहीं भेज पा रहा है.

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जैसे ही प्रशासन को इसकी सूचना मिली वैसे ही प्रखंड विकास पदाधिकारी टुडू दिलीप महिला के घर जा पहुंचे. बच्चे का अस्पताल में इलाज कराया और घर में खाने- पीने का जरूरी सामान पहुंचाया. प्रशासन के अलावा कुछ एनजीओ भी इस परिवार की मदद करने में जुट गए हैं.

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