झारखंड

कोरोना काल में लाशों का अंबार, देश के इस शहर में दाह संस्कार के लिए कम पड़ रहीं लकड़ियां

आकाश कुमार/सत्यजीत कुमार
  • रांची ,
  • 20 अप्रैल 2021,
  • अपडेटेड 12:10 PM IST
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कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए पहले ICU बेड्स, ऑक्सीजन सिलेंडर और जरूरी दवाओं के लिए भागदौड़ और दुर्भाग्य से किसी मरीज की कोविड-19 से मौत हो जाती है तो फिर उसके अंतिम संस्कार के लिए लंबी वेटिंग. झारखंड की राजधानी रांची में कोविड-19 मौतों के लिए एकमात्र मुक्तिधाम श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के लिए लंबी वेटिंग को देखते हुए लोगों का सब्र जवाब दे गया. उन्होंने सोमवार को घाघरा नामकुम रोड को जाम कर दिया. 

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दरअसल,रांची में हर रोज़ कोरोना से औसतन लगभग 50 मौत हो रही है. कोविड-19 मृतकों के लिए रांची में घाघरा नदी के तट पर सिर्फ एक श्मशान घाट है. एक अंतिम संस्कार पूरा होने में कम से कम साढ़े तीन घंटे का समय लगता है. ऐसे में अंतिम संस्कार के इंतजार में लंबी कतार लग जाती है. सोमवार को स्थिति और खराब हो गई जब चिताएं जलाने के लिए श्मशान घाट पर लकड़ी की ही कमी हो गई.  

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ऐसे में मृतकों के करीबी लोगों का सोमवार को धैर्य जवाब दे गया. उन्होंने  हाईकोर्ट और जमशेदपुर रोड को जोड़ने वाले घाघरा नामकुम रोड को जाम कर दिया. रांची नगर निगम की ओर श्मशान घाट पर जिन कर्मचारियों को तैनात कर रखा है, उन्होंने शवों को जलाने में हो रही देरी के लिए लकड़ी की कमी को वजह बताया. उनका कहना था कि जैसे जैसे लकड़ी उपलब्ध हो रही है वैसे वैसे शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है.   

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अंतिम संस्कार में हो रही देरी की वजह से शवों को लाने वाली एंबुलेंस को भी श्मशान घाट के बाहर घंटों तक खड़े रहने पड़ता है. घाघरा नदी के किनारे स्थित मुक्तिधाम पर प्रशासन की ओर से दाह संस्कार के लिए की गई सारी व्यवस्थाएं  शवों की इतनी ज्यादा संख्या के सामने नाकाफी नजर आई. सुबह से ही यहां एंबुलेंस की कतार लगनी शुरू हो गईं. दिन में तपती गर्मी में लोग दस-दस घंटे तक एंबुलेंस में अपने करीबी का शव लिए इंतजार करते नजर आए. सड़क पर खड़ी एम्बुलेंस की कतार से जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई.   

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लोगों की ये भी शिकायत थी कि श्मशान घाट पर न लकड़ी जैसी पर्याप्त व्यवस्था है और न ही कोई उनकी व्यथा सुनने के लिए सरकार की तरफ से कोई अधिकारी वहां मौजूद है. 

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ये स्थिति तब है जब झारखंड हाईकोर्ट प्रशासन पर तल्ख टिप्पणी कर चुका है कि अंतिम संस्कार की व्यवस्था में बहुत संवेदनशीलता दिखानी चाहिए . इस काम को पूरे सम्मान से किया जाना चाहिए जिससे मृतक की आत्मा को शांति मिल सके. इस टिप्पणी के बाद  झारखंड के स्वास्थ्य सचिव ने निर्देश जारी किए थे कि 24 घंटे के अंदर किसी भी शव का अंतिम संस्कार हो जाना चाहिए. इसके लिए दिन-रात शिफ्टों में व्यवस्था की बात की गई थी जो सोमवार को ध्वस्त होती दिखी. 

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