J-K में कमजोर होने से परेशान है पाक, भारत के अंदर करवा सकता है हमला

सूत्रों के मुताबिक, घाटी में अलगाववादियों और आतंकियों को बहुत कम लोकल सपोर्ट मिल रहा है. कश्मीर के लोग आतंक से परेशान हैं. वो महसूस कर रहे हैं कि उन्हें अलगाववादियों ने कैद कर रखा है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

रणविजय सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 22 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 11:41 AM IST

जम्मू कश्मीर में हिंसक झड़प और पत्थरबाजी जैसी घटनाएं खात्मे के कगार पर हैं. पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर में ऐसी घटनाओं को अंजाम देने में कमी आई है, लेकिन ये एक संदेश है कि पाकिस्तान कुछ बड़ा प्लान कर रहा है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान अब भारत के अंदर इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने की फिराक में है.

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लोग घाटी के हालात से नाखुश

सूत्रों के मुताबिक, घाटी में अलगाववादियों और आतंकियों को बहुत कम लोकल सपोर्ट मिल रहा है. कश्मीर के लोग आतंक से परेशान हैं. वो महसूस कर रहे हैं कि उन्हें अलगाववादियों ने कैद कर रखा है. साथ ही हाल के दिनों में बढ़ी आतंकियों की संख्या को लेकर भी वो परेशान हैं. इन सब वजहों से घाटी के लोगों को साहस मिला है कि वो आतंक के खिलाफ खड़े हो जाएं.

इस साल मारे गए 202 आतंकी

यही वजह रही कि सितंबर 2016 के बाद से आतंकी किसी बड़ी घटना को अंजाम नहीं दे सके हैं. बता दें, सितंबर 2016 में उरी में सेना के हेडक्वार्टर पर हमला हुआ था, जिसमें 19 जवान शहीद हुए थे. हाल के दिनों में जितने भी जवान शहीद हुए है, वे सभी काउंटर टेरर ऑपरेशन के दौरान हुए हैं. आतंकियों के खिलाफ ऐसे ऑपरेशन में 2017 में ही 202 आतंकी मारे गए हैं. ये हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा है.

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सेना के प्रति कायम हुआ भरोसा

हाल के दिनों में आतंकियों के बारे में जानकारी और इनपुट पहले की अपेक्षा जल्दी और आसानी से मिल जा रही है. ये दिखाता है कि लोकल लोग सेना के साथ सहज हैं और इस समस्या का खात्मा चाहते हैं. यही वजह है कि घाटी में आतंकी भी डरे हुए हैं.

सोमवार-मंगलवार की रात हंदवाड़ा में तीन लश्कर-ए-तैयबा के आंतकी एक घर में घुस गए. सेना ने तुरंत मोर्चा संभाला और लोकल लोगों ने भी उन्हें आसानी से ऑपरेशन लॉन्च करने की इजाजात दी, जिस वजह से तीनों ढ़ेर कर दिए गए. इसी तरह लश्कर-ए-तैयबा के चीफ जकीर उर रहमान लखवी का भांजा भी पिछले दिनों मारा गया.

घाटी में बदलाव से पाक परेशान

सूत्रों का कहना है कि घाटी में बदलाव पाकिस्तान के लिए सबसे खराब वक्त पर आया है. जहां एक ओर पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) में लोग जमकर पाकिस्तान के खि‍लाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं, पाकिस्तान पर आतंक को लेकर दबाव भी बढ़ा है.

साथ ही पाकिस्तान में हाल के दिनों में वो पत्थरबाजी और हिंसा फैलाने जैसी घटनाओं को भी अंजाम नहीं दे पा रहा. इसलिए इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि पाकिस्तान हड़बड़ाहट में भारत के अंदरूनी इलाकों में ऐसी घटनाओं को अंजाम दे सकता है. फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस पर पैनी नजर बनाए हुए हैं.

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