नहीं हो सकी अमरनाथ यात्रा, लेकिन वैष्णो देवी यात्रा को इसलिए मिल गई अनुमति

अमरनाथ की पवित्र गुफा कश्मीर घाटी में स्थित है. कहा जा रहा है कि जम्मू डिवीजन में कश्मीर घाटी की तुलना में कोरोना की स्थिति बेहतर है. कश्मीर घाटी में सुरक्षा भी एक प्रमुख मुद्दा था.

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16 अगस्त से श्रद्धालु कर सकेंगे वैष्णो देवी के दर्शन (फाइल फोटोः पीटीआई) 16 अगस्त से श्रद्धालु कर सकेंगे वैष्णो देवी के दर्शन (फाइल फोटोः पीटीआई)

सुनील जी भट्ट

  • श्रीनगर,
  • 12 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 10:33 PM IST

  • अमरनाथ यात्रा से प्रभावित होती व्यवस्था
  • वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के पास हैं कर्मचारी

कोरोना वायरस की महामारी के बीच जम्मू कश्मीर में अमरनाथ यात्रा रद्द कर दी गई थी. अब उसी जम्मू कश्मीर में वैष्णो देवी का मंदिर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोलने की तैयारी है. श्रद्धालु 16 अगस्त से वैष्णो देवी के दर्शन कर सकेंगे. अब यह सवाल भी है कि आखिर क्यों उसी प्रदेश में अमरनाथ यात्रा रद्द कर दी गई और क्यों वैष्णो देवी का मंदिर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोला जा रहा है.

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इसके पीछे भी कई वजहें हैं. अमरनाथ की पवित्र गुफा कश्मीर घाटी में स्थित है. कहा जा रहा है कि जम्मू डिवीजन में कश्मीर घाटी की तुलना में कोरोना की स्थिति बेहतर है. कश्मीर घाटी में सुरक्षा भी एक प्रमुख मुद्दा था. अमरनाथ यात्रा रद्द किए जाने के पीछे यात्रा मार्ग पर कोई स्थायी ढांचा न होना भी प्रमुख वजह बताया जा रहा है. ऐसे में यात्रा संपन्न कराने के लिए प्रशासन को तीर्थयात्रियों की व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करना होता.

वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जम्मू सरकार की ओर से जारी एसओपी के मुताबिक हर दिन अधिकतम 500 बाहरी श्रद्धालुओं को ही इजाजत दी जाएगी. साथ ही बाहर से आने वाले हर श्रद्धालु का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा. कहा जा रहा है कि इससे संक्रमण फैलने का खतरा कम होगा. श्रीमाता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड आइसोलेशन के लिए भी अलग प्रबंध कर सकता है. श्राइन बोर्ड कटरा से ही यात्रा मार्ग पर कई इमारतों का प्रबंधन कर भी रहा है.

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श्रीमाता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के पास यात्रा के प्रबंधन के लिए पर्याप्त कर्मचारी भी हैं. वैष्णो देवी यात्रा के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी अमरनाथ यात्रा की तरह कोई बड़ी चिंता का विषय नहीं. वैष्णो देवी यात्रा के आधार कैंप कटरा तक रेल कनेक्टिविटी भी है. वहीं, श्री अमरनाथ मंदिर के लिए जाने से पहले तीर्थयात्रियों को जम्मू के यति निवास भवन में ठहराना पड़ता है. इसके बाद प्रशासन इन श्रद्धालुओं को जत्थों में सड़क मार्ग से आगे की यात्रा पर रवाना किया जाता है.

कहा यह जा रहा है कि यदि इस साल अमरनाथ यात्रा की अनुमति दी जाती, तो कई जिलों की व्यवस्था प्रभावित होती. यात्रा मार्ग में पड़ने वाले कई जिलों के प्रशासन को यात्रा संचालन के लिए कर्मचारियों को तैनात करना पड़ता. यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को भी तैनात करना पड़ता. इससे जिलों की व्यवस्था प्रभावित होने का अंदेशा था.

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