हिमाचल प्रदेश में बारिश आफत बनकर बरस रही है. हर तरफ बस तबाही का मंजर है. हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई, जिससे भूस्खलन हुआ और राज्य में 100 से अधिक सड़कें बंद हो गई. मौसम विभाग ने 10 अगस्त को राज्य के अलग-अलग स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश, गरज के साथ छींटे और बिजली गिरने का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. आईएमडी ने अगले 24 घंटों में कांगड़ा, सिरमौर, चंबा, शिमला, कुल्लू, किन्नौर, सोलन और मंडी जिलों के अलग-अलग हिस्सों में बाढ़ के खतरे की भी चेतावनी दी है.
हिमाचल में भारी बारिश का अलर्ट
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, मंडी में 37, शिमला में 29, कुल्लू में 26, कांगड़ा में छह, किन्नौर और लाहौल-स्पीति में चार-चार, सिरमौर में दो और हमीरपुर में एक सहित कुल 109 सड़कें बंद हैं, जबकि 58 ट्रांसफार्मर और 15 जलापूर्ति योजनाएं बाधित हैं. अगले पांच से छह दिनों के दौरान मॉनसून की गतिविधि की तीव्रता में वृद्धि होने की संभावना है. इसके अलावा मौसम विभाग ने कुछ स्थानों पर भूस्खलन और अचानक बाढ़ आने की संभावना के बारे में भी चेतावनी दी है.
बता दें कि 7 अगस्त की शाम से सिरमौर जिले के पांवटा साहिब में सबसे अधिक 116.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, इसके बाद नारकंडा (89 मिमी), धौलाकुआं (76.5 मिमी), करसोग (64.2 मिमी), नाहन (60.3 मिमी), कटुला (44.3 मिमी), घरमूर (42.8 मिमी), शिमला (32.8) और कुफरी (32 मिमी) में बारिश दर्ज की गई.
भूस्खलन और बादल फटने से हुई 22 लोगों की मौत
हिमाचल प्रदेश में लगातार भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएं सामने आ रही है, जिसकी वजह से कई लोगों की मौत हो गई और घायलों का अस्पतालों में उपचार चल रहा है. हिमाचल प्रदेश के शिमला, कुल्लू और मंडी जिलों में 31 जुलाई की मध्यरात्रि को बादल फटने से आई बाढ़ में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 30 से अधिक लापता लोगों की तलाश की जा रही है. कुल्लू के निरमंड, सैंज और मलाना, मंडी के पधर और शिमला के रामपुर बाढ़ से प्रभावित हैं. सबसे ज्यादा प्रभावित समेज गांव है, जो रामपुर उपखंड के सरपारा पंचायत के अंदर आता है. इस गांव में करीब 25 लोग लापता हैं.
अधिकारियों ने बताया कि मंडी के राजभान गांव से नौ शव बरामद किए गए हैं. वहीं कुल्लू जिले के निरमंड और बागीपुल से तीन और शिमला जिले के धड़कोल, ब्रो और सुन्नी बांध के समेज और आसपास के इलाकों से 10 शव बरामद किए गए हैं. कुल 22 शवों में से 6 बीते बुधवार को बरामद किए गए , जिसमें चार शिमला में और दो कुल्लू में मिले हैं.
पुलिस ने बताया कि अब तक 12 शवों की पहचान हो चुकी है. वहीं शवों की पहचान के लिए डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं. अधिकारियों के अनुसार, करीब 85 किलोमीटर के क्षेत्र में तलाशी अभियान जारी है. राज्य के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि इससे ज्यादा शव मिलने की संभावना कम है, क्योंकि बह चुके इलाकों में पहले ही तलाशी हो चुकी है. करीब 30 लोग जो अभी भी लापता हैं, उनके परिवार के सदस्यों ने उम्मीद खोना शुरू कर दिया है, क्योंकि लगातार बारिश के बीच पीड़ितों का पता लगाने के लिए तलाशी अभियान बुधवार को सातवें दिन भी जारी रहा, लेकिन अब तक लापता लोगों का कुछ पता नहीं चला है.
समेज गांव में चल रहे अभियान के बारे में जानकारी देते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के सहायक कमांडिंग अधिकारी करम सिंह ने बताया, "बारिश हो रही है, लेकिन संयुक्त तलाशी और बचाव अभियान जारी है." सिंह ने कहा, "सतलज नदी में जलस्तर बढ़ रहा है और कई जगहों पर भूस्खलन भी हो रहा है. सड़कों को साफ करने के लिए जेसीबी और अन्य मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है. हमारे जवान कुशल हैं और रस्सियों के जरिए नदी पार कर उन जगहों की तलाश कर रहे हैं, जहां लापता लोगों के मिलने की संभावना है." वहीं पिछले एक सप्ताह से घटनास्थल पर डेरा डाले हुए लापता लोगों के परिवार के सदस्य अब शवों की बरामदगी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं ताकि अंतिम संस्कार किया जा सके.
बता दें कि बीते मंगलवार को समेज गांव और शिमला तथा कुल्लू के अन्य इलाकों का दौरा करने वाली भाजपा सांसद कंगना रनौत ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर पीड़ितों की मदद के लिए "कुछ नहीं" करने का आरोप लगाया था. अधिकारियों के अनुसार, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, हिमाचल प्रदेश पुलिस और होमगार्ड की टीमों के 663 बचावकर्मी तलाश अभियान में लगे हुए हैं और बचावकर्मियों ने अधिक मशीनरी, खोजी कुत्तों के दस्ते, ड्रोन और अन्य उपकरणों को तैनात करके तलाशी अभियान तेज कर दिया है. वहीं 27 जून से 7 अगस्त के बीच अब तक बारिश से संबंधित घटनाओं में कुल 94 लोग मारे गए हैं और राज्य को 787 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
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