रेवाड़ी की बेटियों से जानिए 'खट्टर सरकार' में कितनी सुरक्षित हैं महिलाएं

रेवाड़ी जिले के गोठड़ा गांव की इन लड़कियों के लिए एक गांव से दूसरे गांव की तीन किलोमीटर की दूरी किसी जहन्नुम से कम नहीं है. यह दूरी इनकी पूरी जिंदगी बदल रही है. इस गांव की लड़कियां पढ़ना चाहती हैं और पढ़ने के लिए सरकार से गुहार लगा रही हैं.

अनशन पर बैठी बेटियां
आशुतोष मिश्रा/सुरभि गुप्ता
  • रेवाड़ी,
  • 17 मई 2017,
  • अपडेटेड 3:19 PM IST

हरियाणा के एक गांव में इतिहास रचा गया. भारत के इतिहास में यह पहली घटना होगी जब एक साथ किसी स्कूल की 80 से ज्यादा लड़कियां धरने पर बैठीं. धरना ही नहीं बल्कि लगभग 13 लड़कियां आमरण अनशन कर रही थीं. जिस हरियाणा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा दिया, आज उसी हरियाणा की बेटियां 10वीं तक का स्कूल 12वीं तक कराने के लिए आठ दिनों तक हड़ताल करना पड़ा. लड़कियां छेड़खानी की घटनाओं से इस कदर परेशान हैं कि वे 10वीं के बाद पढ़ाई के लिए दूसरे गांव के स्कूल नहीं जाना चाहती हैं और उनकी मांग है कि उनके गांव के स्कूल को ही 12वीं तक कर दिया जाए.

पढ़ाई के लिए बेटियों की सरकार से गुहार रेवाड़ी जिले के गोठड़ा गांव की इन लड़कियों के लिए एक गांव से दूसरे गांव की तीन किलोमीटर की दूरी किसी जहन्नुम से कम नहीं है. यह दूरी इनकी पूरी जिंदगी बदल रही है. इस गांव की लड़कियां पढ़ना चाहती हैं और पढ़ने के लिए सरकार से गुहार लगा रही हैं कि उन्हें और कुछ नहीं बस स्कूल चाहिए. अनशन और धरने कई मुद्दों पर होते हैं लेकिन हरियाणा में अनशन के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा गया, जब कच्ची उम्र की दहलीज पर खड़ी लड़कियों ने 17 साल पुरानी मांग के लिए सड़क पर उतरने की ठान ली.

छेड़खानी की घटनाओं से परेशान हैं बेटियां गोठड़ा गांव में सरकारी स्कूल सिर्फ कक्षा 10 तक हैं और आगे की पढ़ाई के लिए गांव की लड़कियों को तीन किलोमीटर दूर कवाली गांव तक का सफर तय करना पड़ता है. तीन किलोमीटर की दूरी इस गांव की लड़कियों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है. रास्ते में एक शराब का ठेका है जहां पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा होता है. इतना ही नहीं कवाली गांव के इस सीनियर सेकेंडरी स्कूल और श्री कृष्णा कॉलेज के बाहर भी शरारती तत्वों का जमावड़ा रहता है. गांव की लड़कियों का आरोप है कि वहां अक्सर उनके साथ छेड़खानी की घटनाएं होती हैं. लड़कियों का आरोप है कि वहां घूमने वाले लड़के भद्दे कमेंट करते हैं.

शिकायत करने पर करा दी गई शादी लड़कियों ने जब छेड़खानी की शिकायत की तो इसका खामियाजा खुद गांव की लड़कियों को भुगतना पड़ा. शिकायत के बाद कई माता-पिता ने अपनी बच्चियों को दसवीं के बाद आगे पढ़ने के लिए भेजने से ही मना कर दिया, तो कईयों की पढ़ाई छुड़वा कर उनकी शादी कर दी गई.

17 साल से बेटियां कर रही हैं मांग गांव के सरपंच सुरेश चौहान ने 'आज तक' को बताया कि उन्होंने कई बार इन घटनाओं की शिकायत प्रशासन से की लेकिन सुनवाई नहीं हुई. गोठड़ा गांव के लड़कियों की पीड़ा 17 साल पुरानी है. 17 साल पुरानी मांग अपना सब्र खो बैठी और यह लड़कियां सड़क पर उतर आईं. इनकी मांग सिर्फ इतनी है कि स्कूल में दो कक्षाएं जोड़ दी जाएं ताकि लड़कियां बिना डरे, बिना किसी छेड़छाड़ के और बिना किसी पीड़ा के अपनी पढ़ाई कर सकें.

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