12 बहनों का इकलौता भाई… 24 साल बाद हुआ बेटा तो नाम रखा दिलखुश

हरियाणा के जींद जिले के उचाना कलां में सुरेंद्र के घर 24 साल बाद बेटे का जन्म हुआ. इससे पहले परिवार में नौ बेटियां थीं, जबकि ताऊ की तीन बेटियों समेत कुल 12 बहनों को भाई मिला है. अस्पताल में सामान्य डिलीवरी से जन्मे बच्चे का नाम दिलखुश रखा गया. मां रीतू और नवजात दोनों स्वस्थ हैं, पूरे परिवार में खुशी का माहौल है.

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बेटे का जन्म होते ही परिवार और रिश्तेदारों में जमकर जश्न मनाया. (Photo: ITG) बेटे का जन्म होते ही परिवार और रिश्तेदारों में जमकर जश्न मनाया. (Photo: ITG)

सुनील कुमार तिवारी

  • जींद ,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:02 PM IST

हरियाणा के जींद जिले के उचाना कलां गांव में इन दिनों एक घर की कहानी पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. वजह है परिवार की वह खुशी, जो 24 साल बाद आई है. सुरेंद्र के घर आखिरकार बेटे की किलकारी गूंजी है. इससे पहले इस घर में लगातार नौ बार बेटियों ने जन्म लिया, लेकिन इस बार किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि न सिर्फ एक पिता को बेटा मिला, बल्कि पूरे परिवार की 12 बहनों को एक इकलौता भाई मिल गया. सुरेंद्र के भाई की भी तीन बेटियां हैं. 

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देर शाम करीब चार बजे सुरेंद्र की पत्नी रीतू को प्रसव पीड़ा के बाद उचाना के नागरिक अस्पताल लाया गया. अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की निगरानी में सामान्य प्रसव हुआ और बेटे का जन्म हुआ. जैसे ही यह खबर परिवार तक पहुंची, घर से लेकर रिश्तेदारों तक खुशी की लहर दौड़ गई.

रीतू और सुरेंद्र की शादी को करीब 23–24 साल हो चुके हैं. इन वर्षों में रीतू ने नौ बेटियों को जन्म दिया. सुरेंद्र बताते हैं कि जब भी किसी बेटी का जन्म होता, लोग यही कहते भगवान बेटा भी दे दे. इस बार भी जब रीतू गर्भवती थीं, तो पूरा परिवार ईश्वर से यही दुआ कर रहा था कि इस बार बेटा हो, ताकि बेटियों को एक भाई मिल सके. यही नहीं, सुरेंद्र के दूसरे भाई की भी तीन बेटियां हैं, उनके भी कोई बेटा नहीं है. ऐसे में यह बेटा पूरे परिवार के लिए सिर्फ एक संतान नहीं, बल्कि 12 बहनों का साझा भाई बन गया.

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भगवान ने दिल खुश कर दिया, इसलिए नाम रखा दिलखुश

बेटे के जन्म के बाद परिवार ने उसका नाम ‘दिलखुश’ रखा है. इसके पीछे भी एक भावनात्मक वजह है. बुआ वीना बताती हैं, आज हमें दुनिया की सारी खुशियां मिल गई हैं. 9 सगी बहनें और 3 ताऊ की बेटियां. कुल 12 बहनों को भाई मिला है. भगवान राम ने हमारा दिल खुश कर दिया, इसलिए बच्चे का नाम दिलखुश रखा गया है. घर के आंगन में मिठाइयां बंट रही हैं. रिश्तेदारों का आना-जाना लगा हुआ है. हर कोई नवजात को देखने और मां को बधाई देने पहुंच रहा है.

बेटियों को भाई मिल गया, इससे बड़ी खुशी नहीं

पिता सुरेंद्र अपनी भावनाओं को शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं कर पा रहे. उन्होंने कहा, भगवान की कृपा से 9 लड़कियों के बाद बेटा हुआ है. जब भी बेटी होती थी, लोग कहते थे कि भगवान बेटा दे. अब भगवान ने सबकी सुन ली. सबसे बड़ी खुशी ये है कि मेरी बेटियों को भाई मिल गया. उन्होंने बताया कि उनकी सबसे बड़ी बेटी की उम्र 21 साल है और सबसे छोटी बेटी अभी 3 साल की है. पिछले साल नवंबर में उनकी दो बेटियों की शादी भी हुई थी. सुरेंद्र बताते हैं कि घर में सभी बेटियों के नाम अलग-अलग हैं कल्पना, आरती, भारती, खुशी, मानसू, रजनी, रजीव, काफी और माफी. इन सबकी दुआओं से ही आज बेटा हुआ है. 

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मां रीतू ने कहा, भगवान ने नौ बेटियों के बाद बेटा दिया है. शादी को 23 साल हो चुके हैं. मैं भगवान का धन्यवाद करती हूं कि उन्होंने हमें यह खुशी दी. रीतू की उम्र 38 साल है और इससे पहले उनकी नौ डिलीवरी हो चुकी थीं. ऐसे में यह डिलीवरी चिकित्सकीय रूप से भी चुनौतीपूर्ण मानी जा रही थी. परिवार की बड़ी बेटी कल्पना ने बताया कि घर में खुशी का माहौल है. 22 साल के बाद हमारे घर में छोटा बाबू आया है. इतनी खुशी है कि शब्दों में बयां नहीं कर सकते. यह सिर्फ मेरे चाचा का बेटा नहीं, बल्कि हम सभी का भाई है. बहनों का कहना है कि उन्होंने हमेशा एक-दूसरे का सहारा बनकर रहना सीखा, लेकिन अब घर में एक भाई का होना उनके लिए नई खुशी और नई जिम्मेदारी दोनों लेकर आया है. 

डॉ. योगेश शर्मा ने बताया कि रीतू को शाम करीब चार बजे अस्पताल लाया गया था. महिला की पहले नौ डिलीवरी हो चुकी थीं और उम्र भी 38 साल थी, ऐसे में विशेष निगरानी जरूरी थी. लेकिन डिलीवरी सामान्य रही. मां और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं.  डॉ. शर्मा ने बताया कि रीतू सुबह भी अस्पताल आई थीं, लेकिन शाम को दोबारा भर्ती कराया गया. बीपी एक बार थोड़ा बढ़ा था, लेकिन बाद में स्थिति सामान्य हो गई.

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परिवार और रिश्तेदारों में जश्न

मौसी वीना ने बताया कि बेटे के जन्म से पूरे परिवार में खुशी है. मामा, मौसी, बुआ सब खुश हैं. इतनी खुशी है कि शब्द कम पड़ रहे हैं. परिवार के सदस्य प्रवीण ने बताया कि जब बेटे के जन्म की खबर मिली, तो वह खुशी के मारे खड़े भी नहीं हो पा रहे थे. उन्होंने कहा कि डिलीवरी बिल्कुल सही हुई है. सरकारी अस्पताल में इतनी अच्छी सुविधा मिली, इसके लिए हम डॉक्टरों का धन्यवाद करते हैं. 

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