'ताजमहल' नहीं, गुजरात की रानी की वाव है सच्चे प्यार की निशानी, जानें अमर प्रेम की अनसुनी कहानी

वैलेंटाइन डे के मौके पर गुजरात के पाटन स्थित रानी की वाव लोगों के लिए प्रेम का ऐतिहासिक प्रतीक बनकर सामने आती है. यह वाव रानी उदयमती ने अपने पति राजा भीमदेव की स्मृति में बनवाई थी. सात मंजिला यह धरोहर यूनेस्को विश्व विरासत सूची में शामिल है और ₹100 के नोट पर भी दिखाई देती है.

Advertisement
पाटन की रानी की वाव बनी अमर प्रेम की मिसाल (Photo: Screengrab) पाटन की रानी की वाव बनी अमर प्रेम की मिसाल (Photo: Screengrab)

aajtak.in

  • पाटन ,
  • 13 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:36 PM IST

आज जब पूरी दुनिया 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे के रूप में मना रही है, तब गुजरात के पाटन में स्थित रानी की वाव एक अलग ही प्रेम कहानी को सामने लाती है. इसे पाटन का ताजमहल भी कहा जाता है. यह सिर्फ एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि रानी उदयमती और राजा भीमदेव की अमर प्रेम गाथा का प्रतीक है, जो पत्थरों पर आज भी अंकित है.

Advertisement

इतिहासकारों के अनुसार, 11वीं सदी में रानी उदयमती ने अपने दिवंगत पति राजा भीमदेव की याद में इस विशाल वाव का निर्माण करवाया था. यह स्मारक जमीन के ऊपर नहीं बल्कि जमीन के भीतर बनाया गया, जिसे आज रानी की वाव के नाम से जाना जाता है.

सोलंकी वास्तुकला की सात मंजिला अद्भुत धरोहर

सात मंजिला यह वाव सोलंकी वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है. इसकी दीवारों पर हजारों मूर्तियां उकेरी गई हैं, जो आज भी जीवंत प्रतीत होती हैं. यह धरोहर सरस्वती नदी के तट पर स्थित है और सदियों तक मिट्टी में दबी रही. बाद में पुरातत्व विभाग ने इसे खोज निकाला. रानी की वाव को यूनेस्को ने विश्व विरासत सूची में शामिल किया है. 

यूनेस्को विश्व विरासत सूची में शामिल, ₹100 के नोट पर भी दर्ज

इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए भारत सरकार ने इसे ₹100 के नोट पर भी स्थान दिया है. इतिहासकार अशोकभाई व्यास के अनुसार, अक्सर लोग प्रेम के प्रतीक के रूप में ताजमहल का नाम लेते हैं, लेकिन रानी की वाव एक स्त्री द्वारा अपने पति की स्मृति में बनवाया गया दुनिया का सबसे भव्य स्मारक है. यह सिर्फ जल संचय की जगह नहीं थी, बल्कि सोलंकी काल की आस्था और प्रेम का जीवंत दस्तावेज है.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement