राजकोट में 7 साल की निर्भया को 43 दिन में मिला इंसाफ... दरिंदगी करने वाले दोषी को फांसी की सजा

राजकोट के आटकोट इलाके में 7 साल की मासूम बच्ची से रेप और बर्बरता के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने महज 43 दिनों में दोषी को फांसी की सजा सुना दी. आरोपी ने बच्ची को लोहे के सरिया से आंतरिक चोटें पहुंचाई थीं. सरकार ने इस मामले में त्वरित एक्शन को जीरो टोलरेंस का उदाहरण बताया.

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राजकोट निर्भया केस में दोषी को 43 दिन में मौत की सजा सुनाई गई. (प्रतीकात्मक तस्वीर) राजकोट निर्भया केस में दोषी को 43 दिन में मौत की सजा सुनाई गई. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

ब्रिजेश दोशी

  • राजकोट,
  • 17 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:58 PM IST

दिल्ली के निर्भया कांड जैसी ही एक रूह कंपा देने वाली और जघन्य घटना में कोर्ट ने 43 दिन में फैसला सुनाया है. कोर्ट ने दोषी को फांसी की सजा दी है.

दरअसल, गुजरात के राजकोट जिले में 4 दिसंबर 2025 को बगीचे में खेल रही महज 7 साल की मासूम बच्ची को गांव के ही आरोपी रामसिंह डुडवा ने झाड़ियों में ले जाकर हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं थी.  आरोपी ने पहले बच्ची का गला घोंटा. इसके बाद उसने रेप किया और बर्बरता करते हुए उसे लोहे के सरिया से आंतरिक चोटें पहुंचाईं, जिससे बच्ची बुरी तरह लहूलुहान हो गई. दर्द से तड़पती बच्ची को आरोपी छोड़कर मौके से फरार हो गया.

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ये घटना आटकोट के पास कानपार गांव के बाहरी इलाके की है. आरोपी खुद तीन बच्चों का पिता है. 

11 दिन में चार्जशीट, रोजाना सुनवाई का आदेश

घटना के बाद राजकोट ग्रामीण पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 8 दिसंबर 2025 को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. जांच अधिकारी ने महज 11 दिनों में पूरी जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर दी. मामले की गंभीरता और क्रूरता को देखते हुए विशेष अदालत ने सुनवाई को दैनिक आधार पर चलाने का आदेश दिया.

अदालत में सिर्फ 6 दिनों में सभी अहम गवाहों और सबूतों की रिकॉर्डिंग पूरी कर ली गई. इसके बाद 12 जनवरी 2026 को, यानी घटना के 35वें दिन अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया.

पिता की चिट्ठी और अदालत ने दिखाया सख्त रुख

इस दौरान पीड़िता के पिता ने अदालत को एक विस्तृत पत्र लिखकर आग्रह किया कि उनकी बेटी के साथ जो अमानवीय कृत्य हुआ है, उसके लिए आरोपी को कठोरतम सजा दी जाए. अदालत ने अपराध की बर्बरता, सामाजिक प्रभाव और पीड़ित परिवार की पीड़ा को ध्यान में रखते हुए सुनवाई को प्राथमिकता दी.

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43वें दिन सुनाई गई फांसी की सजा

राजकोट की विशेष पॉक्सो अदालत के न्यायाधीश वी. ए. राणा ने 17 जनवरी को अंतिम फैसला सुनाते हुए आरोपी रामसिंह डुडवा को मौत की सजा (फांसी) सुनाई. इस तरह घटना के महज 43 दिनों के भीतर दोषी को फांसी की सजा देकर न्याय प्रणाली ने एक सख्त मिसाल कायम की.

डिप्टी CM हर्ष संघवी का सख्त संदेश

इस फैसले के बाद गुजरात के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री हर्ष संघवी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा, हमारी बेटियों पर हमला यानी जीवन का अंत. गुजरात में लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर हमारी नीति बिल्कुल साफ है- शून्य सहनशीलता.

उन्होंने कहा कि आटकोट पॉक्सो केस में एफआईआर से लेकर सजा तक की पूरी प्रक्रिया करीब 40 दिनों में पूरी हुई, जिससे यह साफ होता है कि गुजरात में अब अपराधियों को सालों तक न्याय से बचने का मौका नहीं मिलेगा.

हर्ष संघवी ने कहा कि यह सिर्फ एक मामला नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक सशक्त संदेश है. जो लोग बेटियों पर हाथ उठाते हैं, उनके लिए कोई दया नहीं है, केवल कठोर दंड है. उन्होंने राजकोट ग्रामीण पुलिस, सरकारी वकीलों और पूरी न्याय व्यवस्था को त्वरित और पेशेवर कार्रवाई के लिए बधाई दी.

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