WFH में कितनी बिजली खर्च हो रही? इंफोस‍िस रखेगी कर्मचारियों की बिजली खपत का हिसाब 

इस सर्वे में कर्मचारियों से काम के घंटों के दौरान घर की बिजली खपत, ऑफिस से जुड़े काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों जैसे लैपटॉप, मॉनिटर, इंटरनेट डिवाइस की जानकारी मांगी जा रही है. इसके अलावा उनसे यह भी पूछा जा रहा है कि बिजली की बचत कैसे की जा सकती है.

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इन्फोसिस कर्मचारियों से क्यों पूछ रही है बिजली का हिसाब? इन्फोसिस कर्मचारियों से क्यों पूछ रही है बिजली का हिसाब?

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:53 PM IST

इंफोस‍िस ने अपने हाइब्रिड वर्क मॉडल के तहत काम कर रहे कर्मचारियों से अब उनके घर की बिजली खपत से जुड़ी जानकारी मांगी है. कंपनी का कहना है कि इसका मकसद अपने कुल पर्यावरणीय असर का सही आकलन करना है.

कुछ महीने पहले इंफोस‍िस में कई दौर की छंटनी हुई थी. उसी समय कंपनी के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति ने युवाओं से हफ्ते में 70 घंटे काम करने की अपील भी की थी. अब उसी कड़ी में कंपनी ने एक नया कदम उठाया है. खबर है कि इन्फोसिस यह जानना चाहती है कि जो कर्मचारी घर से काम कर रहे हैं, वे उस दौरान कितनी बिजली खर्च कर रहे हैं.

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इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंफोस‍िस ने कर्मचारियों के बीच एक सर्वे शुरू किया है. इसमें उनसे पूछा जा रहा है कि जब वे घर से काम करते हैं, तो उस दौरान बिजली की कितनी खपत होती है. यह सर्वे खास तौर पर उन कर्मचारियों के लिए है जो कंपनी की हाइब्रिड वर्क पॉलिसी के तहत काम कर रहे हैं.

महीने में कम से कम 10 दिन ऑफिस आना जरूरी

इंफोस‍िस की मौजूदा नीति के मुताबिक कर्मचारियों को महीने में कम से कम 10 दिन ऑफिस आना जरूरी है. बाकी दिनों में वे घर से काम कर सकते हैं. चूंकि अब बड़ी संख्या में कर्मचारी ऑफिस के बजाय घर से काम कर रहे हैं, कंपनी का मानना है कि घरों में इस्तेमाल हो रही बिजली को भी अपने कुल कार्बन उत्सर्जन के हिसाब में जोड़ना जरूरी है.

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बताया जा रहा है कि इस पहल की जानकारी कर्मचारियों को एक इंटरनल ईमेल के जरिए दी गई. ईमेल में साफ किया गया कि घर से काम के दौरान इस्तेमाल होने वाली बिजली भी कंपनी के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का हिस्सा मानी जाएगी.

इंफोस‍िस के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (सीएफओ) जयेश संघराजका ने कर्मचारियों को भेजे संदेश में इसकी वजह समझाई. उन्होंने कहा कि अब जब हाइब्रिड वर्क कंपनी के कामकाज का स्थायी हिस्सा बन चुका है तो पर्यावरण पर असर सिर्फ ऑफिस कैंपस तक सीमित नहीं रह गया है.

उनके मुताबिक घर से काम करते वक्त इस्तेमाल होने वाली बिजली भी इंफोस‍िस के कुल कार्बन उत्सर्जन में जुड़ती है. इसलिए अपनी रिपोर्टिंग को और बेहतर और सटीक बनाने के लिए यह जानकारी जरूरी है.

सर्वे में कर्मचारियों से क्या पूछा जा रहा है?

इस सर्वे में कर्मचारियों से काम के घंटों के दौरान घर की बिजली खपत, ऑफिस से जुड़े काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों जैसे लैपटॉप, मॉनिटर, इंटरनेट डिवाइस की जानकारी मांगी जा रही है. इसके अलावा उनसे यह भी पूछा जा रहा है कि बिजली की बचत कैसे की जा सकती है.

कंपनी का कहना है कि ये प्रक्रिया आसान है और इसका मकसद सिर्फ उत्सर्जन से जुड़ा सही डेटा जुटाना है. कर्मचारियों से इसमें सहयोग करने की अपील भी की गई है. इससे मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल कंपनी अपने आंतरिक आकलन, नियमों के पालन और निवेशकों व अन्य हितधारकों को दी जाने वाली रिपोर्टिंग में करेगी.

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क्यों जुटाई जा रही है यह जानकारी?

इंफोस‍िस पिछले 15 सालों से पर्यावरण से जुड़ी अपनी स्थिरता योजनाओं पर काम कर रही है. पहले इसका फोकस सिर्फ ऑफिस कैंपस से होने वाले उत्सर्जन तक सीमित था लेकिन अब इसमें घर से काम जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल की जा रही हैं.

कोरोना के बाद भी इंफोस‍िस ने हाइब्रिड वर्क सिस्टम जारी रखा है. कर्मचारियों की ऑफिस उपस्थिति ऑटोमेटेड सिस्टम से ट्रैक की जाती है. तय दिनों से ज्यादा अगर कोई कर्मचारी घर से काम करना चाहता है तो उसे पहले अपने मैनेजर से अनुमति लेनी होती है.

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