अवैध निर्माण पर साउथ एमसीडी की सख्ती, 100 मजदूर और 4 जेसीबी लगवा गिराई बिल्डिंग

स्थाई समिति अध्यक्ष के मुताबिक इस तरह की कार्रवाई इसलिए की गई ताकि अवैध निर्माण कर के ग्राहकों को बेवकूफ बनाने वाले बिल्डरों के मन में कानून का डर बनाया जा सके. क्योंकि कई बिल्डर लोगों को बिना सच्चाई बताए अवैध तरीके से बना प्लैट, फ्लोर या घर बेच देते हैं जबकि उन्होंने इसका नक्शा भी पास नहीं कराया होता है.

दिल्ली में अवैध निर्माण
रवीश पाल सिंह/कौशलेन्द्र बिक्रम सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 10 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 2:55 AM IST

अवैध निर्माण पर साउथ एमसीडी का हथौड़ा एक बार फिर चला है. पिछले दो दिनों में साउथ एमसीडी ने 12 अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनको ढहा दिया है.

दरअसल, साउथ एमसीडी में स्थाई समिति अध्यक्ष भुपेंद्र गुप्ता ने अधिकारियों के साथ साउथ जोन का दौरा किया था. दौरे के वक्त टीम ने छतरपुर एन्क्लेव में अवैध निर्माण को देखा. स्थाई समिति अध्यक्ष ने उनके साथ मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध निर्माण पर तुरंत कार्रवाई हो.

इसके बाद निगम अधिकारियों ने बिल्डिंग विभाग को, दिल्ली पुलिस की फोर्स, 100 मजदूर और 4 जेसीबी मंगवाने के निर्देश दिए. सभी के आने के बाद स्थाई समिति अध्यक्ष भुपेंद्र गुप्ता के सामने ही 12 अवैध संपत्तियों को ढहा दिया गया.

निगम की कार्रवाई से संपत्ति मालिकों में हड़कंप मच गया. हालांकि भारी पुलिस बल की मौजूदगी के चलते वो तोड़फोड़ का विरोध नहीं कर पाए. स्थाई समिति अध्यक्ष के मुताबिक इस तरह की कार्रवाई इसलिए की गई ताकि अवैध निर्माण कर के ग्राहकों को बेवकूफ बनाने वाले बिल्डरों के मन में कानून का डर बनाया जा सके. क्योंकि कई बिल्डर लोगों को बिना सच्चाई बताए अवैध तरीके से बना प्लैट, फ्लोर या घर बेच देते हैं जबकि उन्होंने इसका नक्शा भी पास नहीं कराया होता है.

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

गौरतलब है कि साउथ एमसीडी ने इसी साल अगस्त से अवैध निर्माण के खिलाफ मुहिम चलाई हुई है. अगस्त 2017 में भी हाईकोर्ट के आदेश के बाद निगम अधिकारियों की टीम ने साउथ जोन का दौरा किया था. जिसके बाद अवैध निर्माण पाए जाने पर छतरपुर, सेदुल्लाजाब, खिड़की एक्सटेंशन, चिराग दिल्ली, खानपुर और कृष्णा पार्क में टीम ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की गई थी. निगम ने इस दौरान 7 अवैध निर्माण को गिराया था तो वहीं 2 सम्पतियों को सील किया गया था.

डिमोलेशन करने के बाद साउथ एमसीडी ने जल बोर्ड और बिजली कंपनी से भी यहां के कनेक्शन काटने को बोल दिया था ताकि बिल्डर फिर से यहां अवैध निर्माण ना कर सके.

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