दिल्ली: मैटलिक मांझे से कोविड अस्पतालों पर मंडरा रहा बिजली जाने का खतरा

इस बार कोविड की वजह से कई अस्पतालों में बिजली की निर्बाध सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है. क्योंकि मैटेलिक मांझे वाली पतंगें तारों में उलझ कर अस्पातालों की बिजली सप्लाई प्रभावित कर सकती हैं.

बिजली कंपनियों को सता रहा पतंगबाजी का डर
कुमार कुणाल
  • नई दिल्ली,
  • 14 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 3:53 AM IST

  • बिजली कंपनियों को सता रहा है डर
  • अस्पतालों में बिजली ना गुल कर दे पतंगें

इस साल आजादी के जश्न के मौके पर दिल्ली में बिजली कंपनियों को एक अलग ही चिंता सता रही है. चिंता है कि कहीं आपकी पतंग पेंच लड़ाते-लड़ाते, अस्पतालों की बिजली ना गुल कर दे. दरअसल दिल्ली में कई लोग बैन के बावजूद मैटेलिक मांझा का इस्तेमाल करते हैं, जिसकी वजह से एक बड़े इलाके की बिजली गायब हो जाती है. बिजली कंपनियों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत, हाई टेंशन तारों के इर्द गिर्द उड़ाए जाने वाले पतंगें हैं, जो बिजली फॉल्ट की वजह बनते हैं.

वैसे तो फॉल्ट की वजह से किसी खास इलाके में दिक्कत होती है, लेकिन इस बार कोविड की वजह से कई अस्पतालों में बिजली की निर्बाध सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है. क्योंकि मैटेलिक मांझे वाली पतंगें तारों में उलझ कर अस्पातालों की बिजली सप्लाई प्रभावित कर सकती हैं.

दिल्ली की प्राइवेट बिजली कंपनियों ने लोगों से अपील की है वो इस बार पतंग उड़ाते समय खास सावधानी बरतें. उत्तरी दिल्ली में बिजली का डिस्ट्रीब्यूशन देखने वाली कंपनी टाटा पावर, दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड के सीईओ गणेश श्रीनिवासन ने आजतक को बताया कि "दिल्ली में मांझे पर बैन के बावजूद कई इलाकों में मैटेलिक मांझे का इस्तेमाल किया जाता है, पिछले साल 15 अगस्त को पतंगबाजी की वजह से 12 जगहों पर बड़े फॉल्ट हुए थे."

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दरअसल हाईवोल्टेज तारों में फॉल्ट से एक बड़े इलाके की बिजली गुल होती है, श्रीनिवासन बताते हैं कि "33 केवी और 66 केवी के तारों में गड़बड़ी से 10 हजार की आबादी पर असर पड़ता है, जबकि 11 केवी की तार में गड़बड़ी आने पर ढ़ाई हजार लोगों की बिजली चली जाती है."

मांझे की वजह से बिजली तो जाती ही है, कई बार करंट लगने से लोगों की जान जाने का भी खतरा रहता है. मांझे से कट कर सैकड़ों पक्षियों की जानें जाती हैं और हजारों की तादाद में वो घायल भी होते हैं.

प्रतीकात्मक फोटो

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इसी के मद्देनजर दिल्ली की प्राइवेट कंपनियों ने सोशल मीडिया पर भी कैंपेन चलाया है, ताकि कोविड के समय अस्पतालों में बिजली आपूर्ति का संकट ना पैदा हो.

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