दिल्ली बार काउंसिल ने एक ऐसे वकील का लाइसेंस अस्थाई रूप से 8 हफ्ते के लिए निलंबित कर दिया है जो सार्वजनिक दीवारों पर विज्ञापन देकर अपने लिए काम मांग रहा था. दरअसल इस वकील ने साउथ दिल्ली में कई सार्वजनिक दीवारों पर अपना मोबाइल नंबर चिपका कर वकील के तौर पर लोगों से काम मांगा था. इस वकील का 1994 से बार काउंसिल में नामांकन था.
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के तहत कोई भी वकील काम मांगने के लिए सार्वजनिक तौर पर इस तरह का प्रचार नहीं कर सकता. बार काउंसिल आफ इंडिया के नियम 36 के तहत ये घोर अपराध की श्रेणी में आता है. इस प्रावधान के तहत कोई भी वकील काम मांगने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से विज्ञापन नहीं कर सकता.
इसके अलावा ये वकीलों के पेशेवर आचरण और शिष्टाचार के लिए निर्धारित किये गए मानको के भी खिलाफ है. दरअसल बार काउंसिल ऑफ इंडिया को इस बात की जानकारी दी गई कि वकील शकील खान ने एक वेबसाइट पर अपना मोबाइल नंबर दिया है और इसी वेबसाइट को सार्वजनिक दीवारों पर पेंट कर दिया गया है. इस बात को कंफर्म करने के लिए जब वकील को उसके नंबर पर संपर्क किया गया तो साफ हो गया कि विज्ञापन के लिए ही खुद उसने सार्वजनिक दीवारों को पेंट कराया.
बार काउंसिल ने यह भी पाया कि वकील शकील खान ने सार्वजनिक रूप से दीवारों पर काम के लिए विज्ञापन लगाकर बार काउंसिल के नियमों का भी उल्लंघन किया, साथ ही दिल्ली प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 2007 के प्रावधानों का भी उल्लंघन किया है. डिफेसमेंट एक्ट के अधिनियम की धारा 3 के तहत कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक रूप से किसी भी संपत्ति को स्याही, चॉक, पेंट या किसी अन्य सामग्री से लिखकर चिह्नित करता है तो उसे एक वर्ष तक की सजा या जुर्माने के तौर पर पचास हजार रुपये या दोनों हो सकता है.
दिल्ली बार काउंसिल ने शकील अहमद को फिलहाल अस्थाई रूप से ही निलंबित किया गया है लेकिन साथ ही खान को नोटिस देकर यह भी पूछा गया है कि क्यों ना बार काउंसिल से उनकी सदस्यता स्थाई रूप से खत्म कर दी जाए. बार काउंसिल के मुताबिक कानूनी पेशे व्यापार या व्यवसाय नहीं होता है बल्कि यह ऐसा महान काम है जिसके नैतिक मानदंड और नियम होते हैं और इनका पालन हर वकील को करना अनिवार्य है. वकील शकील खान ने इन्हीं नियमों और नैतिक मानदंडों का उल्लंघन किया है.
पूनम शर्मा