दिल्ली में खुलेआम बिक रही सेना की वर्दी और उससे जुड़े दूसरे सामान

एक एनजीओ फाइट फॉर ह्यूमन राइट्स ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका लगाकर कहा है कि देश में खुलेआम सेना की वर्दी और बाकी के समान जैसे जूते, बेल्ट, टोपी को धड़ल्ले से बेचा जा रहा है.

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भारतीय सेना के जवान (प्रतीकात्मक तस्वीर) भारतीय सेना के जवान (प्रतीकात्मक तस्वीर)

स्मिता ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 19 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 6:32 PM IST

दिल्ली के बाजारों में सेना की वर्दी और उससे जुड़े सामान बड़ी आसानी से मिल रहे हैं. दिल्ली का सरोजिनी नगर बाजार हो या करोल बाग का टैंक रोड, यहां खुलेआम सेना की वर्दी बेची जा रही है वो भी बेहद सस्ते दामों में. सेना की टी-शर्ट, जैकेट, बेल्ट, टोपी और जूते समेत सभी चीजें खुलेआम बिक रही हैं.

26 जनवरी और 15 अगस्त के समय इनकी बिक्री दोगुनी हो जाती है. लोग बड़े चाव से इन्हें खरीदकर इस दिन उसे पहनते हैं और बाजारों में निकलते हैं, देशभक्ति जताने का यह तरीका उनके लिए भले ही सही हो पर क्या यह सुरक्षा के लिहाज से जायज है?

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एक एनजीओ फाइट फॉर ह्यूमन राइट्स ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका लगाकर कहा है कि देश में खुलेआम सेना की वर्दी और बाकी के समान जैसे जूते, बेल्ट, टोपी को धड़ल्ले से बेचा जा रहा है. इसी का फायदा उठा आतंकवादियों ने जनवरी 2016 में पठानकोट में भारतीय सेना के बेस कैंप पर हमला कर दिया था जिसमें लेफ्टिनेंट कर्नल समेत 7 जवानों की मौत हुई थी.

इसी पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा है कि वो दिल्ली समेत पूरे देश में खुलेआम सेना की वर्दी और सेना से जुड़े सामान की बिक्री रोकने के लिए गंभीर क्यों नहीं है? कोर्ट ने कहा केंद्र और राज्य सरकारें लोगों की सुरक्षा को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं, लगता है कि केंद्र सरकार की इसमें कोई दिलचस्पी ही नहीं है.

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कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार को फटकार लगाई जाने के बावजूद अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं और दिल्ली के तमाम बड़े बाजारों में सेना की वर्दी और उससे जुड़े दूसरे समान खुलेआम धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं. दिल्ली हाई कोर्ट ने 8 हफ्ते के भीतर इस पर जवाब मांगा है.

यहां सेना से जुड़ा सामान बेचने वाले महेश 700 रुपये में सेना की पेंट और 250-300 रुपये में टी-शर्ट बेचते हैं. उसके अलावा हजार रुपये में हुबहु नकल का जैकेट भी मिल जाएगा. वहीं जूतों की कीमत ₹700 से ₹1200 की होती है. यह भले ही सेना की वर्दी के कॉपी है लेकिन देखने में इसमें कोई अंतर नहीं बता सकता. इतना ही नहीं इनको खरीदने के लिए भी किसी तरह की ID नहीं लगती, जो कि अपने आप में कई सवाल खड़े करते हैं.

26 जनवरी के दौरान खासतौर पर राजधानी दिल्ली आतंकवादियों के निशाने पर रहती है, लिहाजा इस तरह की जनहित याचिका सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के लिए आंखें खोलने के लिए काफी है क्योंकि आतंकवादी बाजार में बिक रही सेना की वर्दी का इस्तेमाल करते हैं तो ये देश की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है.

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