लगभग दो महीनों तक, लोगों के घरों में पीने का पानी नहीं, बल्कि सीवेज से दूषित, दुर्गंधयुक्त, बदरंग और असुरक्षित पानी आता रहा.
लोगों ने बार-बार बीमार पड़ने, बच्चों को पेट में संक्रमण होने और परिवारों को कई दिनों तक बोतलबंद पानी पर गुजारा करने के लिए मजबूर होने की बात कही, क्योंकि सप्लाई का पानी पीने योग्य नहीं था.
शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. अधिकारी आते, निरीक्षण करते और चले जाते. जमीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं आया – जब तक कि कैमरे नहीं आ गए.
7 जनवरी को आजतक ने खबर दिखाई कि वेस्ट दिल्ली की कुंवर सिंह कॉलोनी में नल किस तरह संभावित मौत के जाल में बदल गए हैं.
निवासियों का कहना है कि इसके बाद जो कुछ हुआ, वह उन्होंने महीनों से नहीं देखा था - कार्रवाई.
9 जनवरी तक ज़मीनी स्तर पर काम शुरू हो गया था. आज, एक सप्ताह से भी कम समय में, कुंवर सिंह कॉलोनी की स्थिति स्पष्ट रूप से बदल गई है. 'अब पानी साफ है'.
अब बस्ती की संकरी गलियों से गुजरें तो माहौल बिल्कुल अलग है.
कभी गंदे पानी से भरी बाल्टियों में अब शुद्ध पानी आता है. हर सुबह नल से पानी आने पर जो डर सताता था, वह अब कम हो गया है. स्थानीय लोगों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है.
आजतक को दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों ने बताया, आईजीएल से संबंधित कार्य के दौरान दिल्ली जल बोर्ड की पानी की पाइपलाइन में हुई क्षति के कारण प्रदूषण फैला. पाइपलाइन टूटने से सीवेज पीने के पानी की पाइपलाइन में मिल गया.
रिपोर्ट मिलने के बाद क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कर दी गई. इसके अलावा, भविष्य में प्रदूषण को रोकने के लिए पुरानी पाइपलाइनों को बदलने सहित एक स्थायी फीडर लाइन पर काम चल रहा है.
निवासियों का कहना है कि यह दीर्घकालिक समाधान ऐसी चीज थी जिसकी वे वर्षों से मांग कर रहे थे लेकिन इसे कभी साकार होते नहीं देखा.
लेकिन अब बदलाव साफ नजर आ रहा है. साफ पानी फिर से बहने लगा है. हमारी रिपोर्ट के एक हफ्ते बाद, कुंवर सिंह कॉलोनी एक ऐसे शहर में त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई का दुर्लभ उदाहरण बन गई है जो व्यापक जल प्रदूषण से जूझ रहा है.
बता दें कि हमारी "दिल्ली का पानी मौत का जाल बन रहा है" नामक सीरीज में पश्चिमी दिल्ली के रमेश नगर स्थित नामधारी कॉलोनी और पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज 2 में भी प्रदूषण की खबरें सामने आईं, जहां के निवासी अभी भी ठोस समाधान का इंतजार कर रहे हैं.
इस संकट का पैमाना चौंकाने वाला है. पिछले साल 1 अप्रैल से 31 दिसंबर के बीच, दिल्ली जल बोर्ड को शहर भर में पानी के दूषित होने से संबंधित लगभग 45,000 शिकायतें प्राप्त हुईं.
डीजेबी (दिल्ली जल बोर्ड) के आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा शिकायतें ट्रांस-यमुना (सर्कल-1) से आईं, इसके बाद सर्कल-8 (सुल्तान पुरी, मंगोल पुरी, नांगलोई, विकासपुरी, किरारी, मुंडका) और सर्कल-9 में जनकपुरी, द्वारका और उत्तम नगर जैसे इलाके शामिल हैं.
डीजेबी का दावा है कि उसकी समाधान दर 98.7% है, लेकिन कई इलाकों के निवासियों का कहना है कि जमीनी हकीकत अक्सर इससे अलग कहानी बयां करती है.
श्रेया चटर्जी