राजधानी दिल्ली में बेघर और मानसिक रोगों से ग्रसित लोगों की कोरोना की जांच कराए जाने और उनके लिए बाकी की सुविधाओं की मांग वाली जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है. दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार के साथ-साथ इस याचिका पर केंद्र सरकार और इंस्टिट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज को भी नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है.
इस जनहित याचिका में मांग की गई है कि दिल्ली में मानसिक रूप से बीमार और लाखों बेघर लोगों की कोरोना वायरस की टेस्टिंग और समुचित मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए. याचिका में कहा गया है कि मेंटल हेल्थ केयर एक्ट के तहत मानसिक रोगियों की देखभाल उस राज्य की सरकार की जिम्मेदारी होती है. इसके अलावा पर्सन विद डिसेबिलिटी एक्ट के तहत भी मानसिक बीमार लोगों की जिम्मेदारी आपदा प्रबंधन स्ट्रेटजी का हिस्सा है.
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याचिका में मांग की गई है कि कोविड-19 को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जो भी गाइडलाइंस बनाई गई है उसमें मानसिक रोगियों को भी शामिल किया जाना चाहिए जिससे कि दिल्ली की सड़कों पर बेघर मानसिक रोगियों को भी कोरोना का इलाज मिल सके. याचिका में कहा गया है कि 9 जून को दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार ने अभी तक मानसिक रोगियों के लिए कोविड-19 को लेकर नई गाइडलाइंस नहीं बनाई है.
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याचिका में कहा गया है कि कोविड-19 के चलते आम लोगों की जिंदगी में भी तमाम दिक्कत देखने को मिल रही है. ऐसे में समाज के सबसे निचले पायदान पर बेघर मानसिक रोगियों की दयनीय स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है. घर से बेघर मानसिक रोगियों को स्पेशल प्रोटेक्शन की जरूरत है. ऐसे में सरकार को इस पर विशेष ध्यान देने और गाइडलाइन बनाने की आवश्यकता है.
वकील गौरव कुमार बंसल की तरफ से लगाई गई याचिका में कहा गया है कि कि सरकार की ओर से गाइडलाइंस के अभाव में मानसिक रोगियों के लिए चलाए जा रहे सरकारी अस्पतालों में प्रशासन को कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं. उन्हें निर्देश नहीं दिया गया है कि वे मानसिक रोगियों का कोविड-19 को लेकर किस तरह से इलाज करें. ऐसे अस्पतालों में फिलहाल भ्रम की स्थिति बनी हुई है जिसे तुरंत दूर किए जाने की जरूरत है. दिल्ली हाई कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को करेगा.
पूनम शर्मा