Beat Report: डिजिटल अरेस्ट के खिलाफ सरकार सख्त! 83000 वॉट्सएप अकाउंट बंद, 3900 स्काइप आईडी भी ब्लॉक

केंद्र सरकार लगातार लोगों से अपील कर रही है कि वे किसी भी अनजान कॉल, लिंक या निवेश के ऑफर पर भरोसा न करें. सतर्क रहकर ही ऐसे साइबर अपराधों से बचा जा सकता है.

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डिजिटल अरेस्ट को लेकर सख्त सरकार. (Photo: ITG) डिजिटल अरेस्ट को लेकर सख्त सरकार. (Photo: ITG)

जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 21 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:48 PM IST

देश में बढ़ते डिजिटल ठगी के मामलों पर रोक लगाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने टेलीकॉम कंपनियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर एक बड़े अभियान की शुरुआत की है.

इस कार्रवाई के तहत पिछले कुछ महीनों में 83,000 से ज्यादा वॉट्सएप अकाउंट और 3,900 स्काइप आईडी को ब्लॉक किया गया है. ये सभी अकाउंट डिजिटल अरेस्ट और निवेश से जुड़े ठगी के मामलों में इस्तेमाल हो रहे थे. इसके अलावा करीब 8.45 लाख सिम कार्ड और 2.39 लाख मोबाइल IMEI नंबर भी बंद किए गए हैं ताकि ठग दोबारा नेटवर्क का इस्तेमाल न कर सकें.

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यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आजकल साइबर अपराधी लोगों को फोन या मैसेज के जरिए डराकर या लालच देकर पैसे ठग रहे हैं. कई मामलों में खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया जाता है. सरकार की इस सख्त कार्रवाई से हजारों विदेशी ठगों का भारत के डिजिटल सिस्टम से संपर्क टूट गया है. इससे साइबर अपराध के बड़े नेटवर्क को काफी नुकसान पहुंचा है और आम लोगों को राहत मिली है.

सरकार लगातार लोगों से अपील कर रही है कि वे किसी भी अनजान कॉल, लिंक या निवेश के ऑफर पर भरोसा न करें. सतर्क रहकर ही ऐसे साइबर अपराधों से बचा जा सकता है. गृह मंत्रालय के I4C (इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर) के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट के मामलों में 60 फीसदी से अधिक पीड़ित वरिष्ठ नागरिक हैं.

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2025 में हुए कई डिजिटल अरेस्ट घोटालों में यह पाया गया कि अपराधी मुख्य रूप से तकनीकी रूप से कम जानकार बुजुर्गों को निशाना बना रहे हैं, जो उनकी बचत को मिनटों में हड़प लेते हैं. गृह मंत्रालय के 14C विंग की तरफ से हाल फिलहाल में एक अलर्ट भी जारी किया गया है, जिसमें यह कहा गया है कि साइबर ठग सीनियर सिटीजन को डिजिटल अरेस्ट के जरिए शिकार बना रहे हैं और इसके लिए इंक्रिप्टेड सिग्नल ऐप का इस्तेमाल उनके द्वारा किया जा रहा है.

सूत्रों ने जानकारी दी है कि साइबर ठग सबसे पहले साधारण फोन और व्हाट्सएप के जरिए डिजिटल अरेस्ट करते हैं और उसके कुछ देर बाद इंक्रिप्टेड सिगनल ऐप में डाइवर्ट करने के लिए कहा जाता है. इस दौरान जिसको डिजिटल अरेस्ट साइबर ठग करते हैं उसको सिग्नल ऐप में जाने के लिए डराया जाता है, जिस वजह से विक्टिम सिग्नल ऐप को अपने मोबाइल में डाउनलोड कर उससे कनेक्ट हो जाता है और वह इस इंक्रिप्टेड ऐप में डिजिटल अरेस्ट हो जाता है.

यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों में ऐसी लगातार रिपोर्ट्स केंद्रीय गृह मंत्रालय के 14c विंग के पास आ रही थी, जिसके बाद गृह मंत्रालय के 14c विंग ने एक बड़ा अलर्ट जारी किया है और कहा है कि सिग्नल ऐप के जरिए अगर कोई किसी को डिजिटल अरेस्ट करता है तो वह फ्रॉड है इससे बचें और किसी भी तरीके से ऐसे साइबर फ्रॉड में न फंसे.

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साइबर फ्रॉड की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय का I4C इसके साथ ही राज्यों की साइबर पुलिस लगातार काम कर रही है लेकिन इन सबके बीच चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. 

I4C से मिली जानकारी के मुताबिक 24 घंटे में 7000 से ज्यादा कंप्लेंट आती हैं. इनमें से 6000 जो कंप्लेंट अटेंड की जाती है. उस कंप्लेंट के आंकड़ों की अगर बात करें तो डेढ़ करोड रुपए हर घंटे में साइबर फ्रॉड करने वाले लोग हमारे और आपके अकाउंट से उड़ा ले जाते हैं. इसमें से सिर्फ 8 करोड़ ही बचता है. साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर के अंदर 24 घंटे ऐसे फ्रॉड करने वाले लोगों के ऊपर MHA साइबर विंग के द्वारा नजर रख जाता है.

बता दें कि साइबर फ्रॉड के जो हॉटस्पॉट है. वहां से डिजिटल अरेस्ट को लेकर अभी भी बड़े स्तर पर बुजुर्ग लोगों को निशाना साइबर फ्रॉड करने वाले लोगों के द्वारा बनाया जा रहा है. यही वजह है कि लगातार व्हाट्सएप अकाउंट और स्काइप आईडी को बंद किया जा रहा है. कोशिश यह की जा रही है कि फेक आईडी बनाकर साइबर फ्रॉड करने वाले लोगों पर कड़ी नकेल कसी जाए. इसके साथ ही लगातार MHA साइबर विंग प्रचार भी कर रहा है कि जो कोई भी साइबर फ्रॉड में फंसता है. वह 1930 पर तुरंत कॉल करें जिससे गोल्डन आवर में विक्टिम का पैसा बचाया जा सके.

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