अतिक्रमण पर HC की फटकार, कहा- DDA-MCD ने जीने का अधिकार छीना

हाई कोर्ट ने कहा, आम लोगों को भी ये समझना चहिए कि वो खुद से अपने अतिक्रमण को हटाएं. लोगों को नियम तोड़ने वाला नहीं होना चाहिए. बल्कि उसका पालन करने वाला होना चाहिए.

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दिल्ली हाई कोर्ट (फाइल) दिल्ली हाई कोर्ट (फाइल)

पूनम शर्मा

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  • 24 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 5:04 PM IST

अतिक्रमण और ट्रैुफिक जाम की समस्या की वजह से दिल्ली के करोल बाग चौराहे पर स्थित विशालकाय हनुमान मूर्ति को एयरलिफ्ट करने की बात हो रही थी. इस बीच हाई कोर्ट ने डीडीए और एमसीडी से पुछा कि हनुमान जी की मूर्ति के आस-पास के अतिक्रमण को हटाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए? मंदिर को छोड़कर बाकी के अतिक्रमण को लेकर क्या कदम उठाए गए?

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हाई कोर्ट ने कहा, आम लोगों को भी ये समझना चहिए कि वो खुद से अपने अतिक्रमण को हटाएं. लोगों को नियम तोड़ने वाला नहीं होना चाहिए. बल्कि उसका पालन करने वाला होना चाहिए. कोर्ट को क्यों आदेश करना चाहिए कि लोग अतिक्रमण को खाली करें, उन्हें खुद अहसास होना चाहिए कि वो कानून को तोड़ रहे हैं. उन्हें एक अच्छे नागरिक के तौर पर खुद ही ये करने से बचना चाहिए.

कोर्ट ने कहा, पब्लिक लैंड और पब्लिक के लिए बने फुटपाथ पर क्यों है ये अतिक्रमण. कोर्ट ने कहा कि ये सारा अतिक्रमण या तो कमर्शियल है या फिर प्राइवेट स्ट्रक्चर है. कोर्ट ने डीडीए को कहा कि वो बग्गा लिक्स को अवैध रूप से चला रहे पेट्रोल पंप को लेकर नोटिस जारी करें और पूछें कि पार्किंग और फुटपाथ की जगह वो कैसे इस्तेमाल कर रहा है. डीडीए ने कोर्ट को बताया कि कुछ अतिक्रमण को उन्होंने कल हटाया है.

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कोर्ट ने कहा, अब तक आपने क्यों कुछ नहीं किया है. क्या आप किसी हादसे का इंताज़र कर रहे हैं? दशकों से हो रहे अतिक्रमण को लेकर आपके पास क्या सफाई है? आप लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जबकि अवैध निर्माण लोगों की जान और स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं.

कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, आप लोगों से राइट टू लाइफ और राइट टू हेल्थ का अधि‍कार छीन रहे हैं. आपको अंदाजा है कि दिल्ली की क्या हालत आप लोगों ने कर दी है. आधी दिल्ली अवैध अतिक्रमण की शिकार है. कोर्ट हर रोज दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से अतिक्रमण हटाने के आदेश देते हैं, लेकिन एजेंसियां हमारे आदेशों का पालन तक नहीं करती हैं।

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