'क्रेजी ब्यूटी सैलून' में आजकल कस्टमर्स का तांता लगा है. हजामत हो या चंपी, सफेद बाल रंगवाने हो या फिर चेहरा हो चमकाना, जो सर्विस चाहिए वो मिलेगी, वो भी एकदम फ्री... हालांकि, बैनर में भले ही इस पार्लर का पता पेहवा, कुरूक्षेत्र हो, मगर आजकल ये कुरुक्षेत्र की जगह दिल्ली के नजदीक सिंघु बॉर्डर से चल रहा है. जी हां, ये हैं किसान आंदोलन के बीच लव सिंह ठाकुर का पार्लर.
हाईवे पर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली के सहारे बड़े-बड़े शीशे लगे हैं. तीन आराम दायक कुर्सियां रखी हैं और यहां बैक टू बैक बाल काटने और दाढ़ी बनाने का काम चल रहा है. लव सिंह ठाकुर कहते हैं कि 'मेरी पत्नी और मैं कुरुक्षेत्र में अपना पार्लर चलाते हैं. हमारे कस्टमर किसान हैं, वहां पर सभी ने कहा कि आपकी जरूरत है सिंघु बॉर्डर पर, तो मैं अपनी टीम के साथ यहां चला आया. दिन में हम लोग 100-150 हेयर कट कर लेते हैं. इसके बाद भी लोगों की लाइन लगी रहती है, कई लोग पैसा भी देना चाहते हैं, मगर हम पैसा नहीं लेते.'
इतना कहते ही लव सिंह भावुक हो उठते हैं.. कई बार तो रो भी पड़ते हैं...पूछने पर बताया कि दरअसल, आज उनकी पत्नी का जन्मदिन है और हर साल वह अपनी पत्नी के लिए कुछ खास करते हैं, मगर आज सिंघु बॉर्डर से ही पत्नी के लिए शुभकामनाएं भेज रहे हैं.
लव सिंह का कहना है कि 'मेरी पत्नी का बड़ा योगदान है पार्लर चलाने में, कोई भी कस्टमर आता है तो उसको चाय भी पिलाती हैं, मेरा भी ध्यान रखती हैं. बर्थडे पर मैं उसे बहुत मिस कर रहा हूं. मैं बिल्कुल ठीक हूं, तुम भी आप अपना ख्याल रखना.' आंखों में आंसू भरे लव सिंह अपना यह संदेश सिंघु बॉर्डर से कुरुक्षेत्र अपनी पत्नी को आज तक के जरिए भेजा है.
दरअसल, हर साल लव सिंह और उनका परिवार विदेश यात्रा पर जाते हैं. इस बार भी उनका कनाडा जाने का प्लान था, लेकिन उन्होंने फैसला किया कि जब देश का अन्नदाता सड़कों पर है, तो इससे बड़ा कोई योगदान नहीं होगा कि वह यहां जाकर अपनी सेवा दें. उनके साथ बाकी टीम मेंबर भी यहां लगभग 15 घंटे काम करते हैं.
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करीब 14 दिन से धरने पर बैठे किसान यहां अपनी हजामत करवा कर बेहद खुश है. एक शख्स ने कहा कि मैं यहां पर आया तो मुझे पता चला कि लव जी का पार्लर चल रहा है. यह बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, हमें पहले बाल कटाने के लिए गांव जाना पड़ता था, लेकिन अब यह काम यहीं हो जा रहा है. यानी कि क्रेजी ब्यूटी सैलून के चलते किसानों को सिंघु बॉर्डर पर ही शेविंग-कटिंग की सुविधा मिल गई है.
उधर, कई बच्चे भी यहां पर बाल कटाने आते हैं. नन्हा अमन 3 दिन से यहां चक्कर काट रहा है, लेकिन बाल कटवाने वालों की लाइन इतनी लंबी थी कि उसका नंबर ही नहीं आया. उसने बताया कि पापा की डांट से बचने के लिए उसको मजबूरन बाल कटाने पड़ रहे हैं. अमन ने कहा कि, अंकल तो पार्लर खोलकर अच्छा काम कर रहे हैं, पर बाल कट जाने से मैं दुखी हूं, क्योंकि मैं बाल बढ़ाना चाहता हूं और पापा हैं कि मानते नहीं.'
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मौसमी सिंह