आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की ओर से लगाए गए लगभग 1.4 लाख चीनी CCTV कैमरों को लेकर राजधानी में बड़ा विवाद छिड़ गया है. ये विवाद ऐसे वक्त में उभरा है जब गलवान घाटी टकराव के बाद देश भर में चीन विरोधी भावनाएं उफान पर हैं.
केंद्र ने चीनी कंपनियों को भारतीय परियोजनाओं से दूर रखने के लिए कई उपाय किए हैं. सोमवार को, भारत ने 59 मोबाइल ऐप्स (ज्यादातर चीनी) मोबाइल एप्स पर प्रतिबंध लगा दिया. इनमें बाइटडॉन्स का टिकटॉक और टेंसेंट का वी चैट भी शामिल हैं. सुरक्षा खतरे को देखते हुए ये कदम उठाया गया.
राष्ट्रीय राजधानी में जो CCTV कैमरे लगाए गए हैं, वो चीनी कंपनी Hikvision के बनाए हुए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि फर्म के मोबाइल एप्लिकेशन को दिल्ली में हजारों लोगों ने अपने फोन पर डाउनलोड किया है जो निगरानी से जुड़ा बड़ा खतरा है, बीजेपी ने इस मुद्दे को लेकर आप सरकार पर निशाना साधा है. साथ ही इस संबंध में तत्काल उपचारात्मक कदम उठाने की मांग की है. इस पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने फौरी प्रतिक्रिया दी-, "यह सब राजनीति है."
विशेषज्ञों ने चेताया
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अनुज अग्रवाल ने कहा, "अकेले CCTV कैमरों से कोई खतरा नहीं है, लेकिन जब लोग अपने मोबाइल फोन पर लाइव फीड देखने के लिए Hikvision के iVMS-4500 ऐप को डाउनलोड करते हैं, तो यह खतरा बन जाता है." अग्रवाल ने आगे कहा, "ऐप को चीन में कंपनी के किसी भी अधिकारी या वहां की सरकार या सेना की ओर से आसानी से एक्सेस किया जा सकता है. ऐसी शत्रुतापूर्ण स्थितियों में, वे देख सकते हैं कि दिल्ली की सड़कों पर क्या हो रहा है. इन कैमरों में ऐसे अतिक्रमण को रोकने के लिए कोई सुरक्षा फीजर्स नहीं हैं, उन्हें आसानी से भेदा जा सकता हैं."
साइबर कानून विशेषज्ञ पवन दुग्गल का इस संबंध में कहना है,"Hikvision के CCTV कैमरे विभिन्न सरकारी और सरकारी परिसरों में लगाए गए हैं. लोग खुश हैं कि उन्हें अपने मोबाइल फोन पर फीड मिल रहा है. लेकिन चिंता करने का एक कारण यह फीड भी है. ये फीड चीन भी जा रही है और इसकी पहुंच संभावित तौर पर चीनी सेना तक भी हो सकती है.” दुग्गल ने कहा, "अगर ऐसा हो रहा है, तो इसका असर न केवल आप पर बल्कि एक राष्ट्र के तौर पर भारत पर भी पड़ने वाला है. यह चीन का अच्छा गेम प्लान है. चीन ने साइबर सुरक्षा के महत्व को बहुत पहले भांप लिया था, साथ ही ये भी कि भारत बहुत उपजाऊ है."
ज़मीनी स्थिति
जब आजतक/इंडिया टुडे ने दिल्ली के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार भागीरथी पैलेस का रुख किया तो वहां तरह के कैमरों की भरमार देखी, क्योंकि ये सस्ते होते हैं.एक दुकान के मालिक विजय सेठी ने बताया कि एक डिवाइस की कीमत 1,200 रुपये से लेकर 3,500 तक है. सेठी ने बताया, "ये लगभग सभी चीन से आते हैं. मौजूदा स्थिति में, व्यापारी चाहते हैं कि चीन से आने वाला सामान बंद हो जाए और भारतीय ब्रैंड्स को बढ़ावा मिले."
दुनिया भर में कार्रवाई
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने कहा है कि Hikvision और 19 अन्य फर्मों का स्वामित्व या नियंत्रण चीनी सेना के पास है. ट्रम्प प्रशासन ने सरकारी एजेंसियों पर Hikvision से खरीदारी पर रोक लगा दी है. Hikvision दुनिया की सबसे बड़ी वीडियो सर्विलांस कंपनियों में से है जो हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर टूल्स, दोनों का उत्पादन करती है. चीन की सेना और सरकार के साथ कथित रूप से जुड़े होने के कारण कुछ यूरोपीय देशों में भी कंपनी पर प्रतिबंध लगा दिया है.
कैसे शुरू हुआ प्रोजेक्ट
पिछले साल जुलाई में, AAP सरकार ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को निर्देश दिया कि वह अपना चुनावी वादा निभाने के लिए दिल्ली और आसपास के आवासीय और व्यावसायिक परिसरों में स्थापना के लिए 1.5 लाख CCTV कैमरे जल्दी खरीदे. यह उन 1.4 लाख CCTV कैमरों के अलावा थे,जिसे दिल्ली सरकार ने राजधानी भर में इंस्टाल किया था.
571 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में से प्रत्येक में कम से कम 4,000 कैमरे लगाना था. इसके अतिरिक्त, दिल्ली के 1,000 सरकारी स्कूलों में ऐसे कैमरे लगाने पर 400 करोड़ रुपये खर्च किए गए. इससे पहले, दिल्ली पुलिस की ओर से मॉनीटर किए जाने वाले 4,388 CCTV कैमरे पुलिस स्टेशन्स, कोर्ट परिसर, बाजारों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में लगाए गए.
Hikvision ने दिल्ली सरकार से 2018 में 1.5 लाख CCTV कैमरे लगाने के लिए एक टेंडर हासिल किया. इस कंपनी को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) की ओर से भी वेंडर के तौर पर सूचीबद्ध किया गया है. BEL भारत सरकार के लिए अत्यधिक संवेदनशील और वर्गीकृत रक्षा परियोजनाओं पर काम करने वाला उपक्रम है.
बीजेपी ने साधा निशाना
दिल्ली में विपक्ष ने Hikvision के साथ तत्काल नाता तोड़ने और उसके ऐप को हटाने की मांग की है. बीजेपी के वरिष्ठ नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा, "विडंबना यह है कि सर्वर तक चीन में स्थित है. इन कैमरों की फीड और डेटा के आधार पर, वे राष्ट्रीय राजधानी में हर जगह देख सकते हैं. दिल्ली सरकार कह रही है कि उन्होंने BEL को अनुबंध दिया था, लेकिन उन्हें जवाब देना चाहिए कि क्यों चीन निर्मित्त कैमरे लगाए गए.”
दिल्ली बीजेपी नेता हरीश खुराना ने कहा, "हाल ही में, सीएम केजरीवाल ने कहा कि भारत चीन के खिलाफ दोहरी लड़ाई लड़ रहा है - एक सीमा पर और दूसरी कोरोनावायरस के खिलाफ. ऐसे में चीनी कंपनियों को बाहर खदेड़ा जाना चाहिए क्योंकि वे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं."
कांग्रेस ने पहले ही जताई थी आपत्ति
कांग्रेस ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के शुरू होने से पहले ही पिछले साल मई में ये मुद्दा उठाया था. कांग्रेस ने आप सरकार पर Hikvision को ठेका देकर "राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता" करने का आरोप लगाया था. तब तत्कालीन दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने इस मुद्दे पर केजरीवाल के इस्तीफे की मांग की थी.
केजरीवाल का जवाब
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को आजतक/इंडिया टुडे से कहा, "यह सब राजनीति है. मैं इसमें शामिल नहीं होना चाहता. हमने भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रम BEL को ठेका दिया था. वो जो खरीद रहे हैं, वह उनका व्यवसाय है. इस पर टिप्पणी करना अभी पूरी तरह राजनीति से जुड़ा है." आज सोमवार को टी.वी. उन्होंने यह भी कहा कि गलवान की घटना के बाद चीनी वस्तुओं पर निर्भरता कम करने के लिए और कदम उठाए जाने चाहिए. (सुशांत मेहरा और निखिल लखवानी के इनपुट्स के साथ)
अभिषेक आनंद