लॉकडाउन के दौरान राजधानी दिल्ली में साफ हुई हवा की स्थिति फिर से खराब हो गई है. तीन महीनों में पहली बार है जब बुधवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई. एजेंसियों के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा सहित आसपास के राज्यों में पराली जलाने के कारण दिल्ली की हवा की गुणवत्ता और भी खराब होने की संभावना है.
जानकारी के मुताबिक हवा की गुणवत्ता के खराब होने की अभी शुरुआत भर हुई है और इसका प्रभाव तीन महीने तक रह सकता है. केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक दिल्ली में पिछले 24 घंटे में एयर क्वालिटी इंडेक्स (Air Quality Index) का स्तर 215 तक पहुंच चुका है, जो कि 'खराब' की श्रेणी में आता है.
मंगलवार को दिल्ली का AQI 178 रहा था. 29 जून के बाद यह पहली बार है दिल्ली की हवा इतनी खराब हुई है, 29 जून को दिल्ली में AQI का स्तर 230 था. हवा की गुणवत्ता (AQI) शून्य से 50 के बीच 'अच्छी', 51 से 100 'संतोषजनक', 101 से 200 'मध्यम', 201 से 300 'खराब', 301 से 400 'बेहद खराब' और 401 से 500 के बीच पहुंचने पर 'गंभीर' मानी जाती है.
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में पीएम 10 का स्तर शाम 6 बजे 234 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (µg/m3) दर्ज किया गया. भारत में पीएम 10 का स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (µg/m3) हो तो सुरक्षित माना जाता है.
पीएम 10 माप में 10 माइक्रोमीटर जितने कण होते हैं, जो सांस लेते समय फेफड़ों में जा सकते हैं. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक ‘सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च’ (सफर) ने बताया कि पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने के मामलों में वृद्धि और प्रतिकूल मौसम के कारण हवा की गुणवत्ता 'खराब' की श्रेणी में पहुंच सकती है.
सफर के अनुसार सोमवार को पराली जलाने के 298 मामले सामने आए थे. SAFAR ने कहा कि AQI के अगले तीन दिनों में और बिगड़ने की उम्मीद है.
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