साल 2025 में दिल्ली ने प्रदूषण में रिकॉर्ड बना दिया. साल 2025 में दिल्ली देश की सबसे प्रदूषित राजधानी बनी. ऊर्जा और स्वच्छ वायु पर अनुसंधान केंद्र (सीआरईए) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में PM10 का सालाना औसत स्तर 197 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय मानक 60 माइक्रोग्राम से लगभग तीन गुना अधिक है.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सालभर में 285 दिन दिल्ली में PM10 का स्तर निर्धारित सीमा से ऊपर रहा, जिसका मतलब है कि अधिकांश दिनों में राजधानी की हवा बेहद खराब और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रही.
PM2.5 के स्तर के मामले में भी दिल्ली की स्थिति चिंताजनक है. 2025 में दिल्ली ने PM2.5 के मामले में देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया, जहां सालाना औसत स्तर 96 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जो राष्ट्रीय मानक 40 माइक्रोग्राम से दोगुना है. दिल्ली में 212 दिन ऐसे गुजरे जब PM2.5 का स्तर मानक से ऊपर था, जो लॉन्ग टर्म स्वास्थ्य जोखिम को साफ-साफ दर्शाता है.
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की बात करें तो यहां के 14 शहरों में से 12 शहर PM2.5 के राष्ट्रीय मानकों को पूरा करने में असफल रहे. स्वच्छ वायु कार्यक्रम के लिए जारी 13,415 करोड़ रुपये में से दिल्ली ने केवल 33 प्रतिशत राशि का उपयोग किया, जो काफी कम माना गया है.
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रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि दिल्ली में प्रदूषण स्रोतों की पहचान के लिए सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी की गई है, फिर भी जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार नजर नहीं आया.
CREA ने साफ कहा है कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के सात साल बाद भी दिल्ली और अन्य शहर मानकों से काफी दूर हैं और वर्तमान समयसीमा में PM10 को 40 प्रतिशत तक घटाना अब संभव नहीं दिखता.
आख़िर में, रिपोर्ट ने PM2.5 पर ज्यादा ध्यान देने, कड़े उत्सर्जन नियंत्रण लागू करने और क्षेत्रीय स्तर पर साझा रणनीति अपनाने की सिफारिश की है ताकि हवा की गुणवत्ता में सुधार हो सके और लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके.
इनपुट: पीटीआई
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