राजधानी की इमारतों को भूकंप से बचाने के लिए हाईकोर्ट के आदेश देने के बाद भी एक्शन प्लान न बनाने पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है. कोर्ट ने नॉर्थ, साउथ और ईस्ट दिल्ली के कमिश्नरों को दिल्ली की इमारतों को भूकंप से बचाने के लिए 4 हफ्ते में एक्शन प्लान बनाने का आदेश दिया है. नाराज कोर्ट ने सख्त लहजे में कह दिया है कि अगर प्लान न बनें तो दिल्ली के सभी एमसीडी के कमिश्नर अगली सुनवाई पर खुद व्यक्तिगत रूप से पेश हों.
साल 2015 में कोर्ट ने दिल्ली के लिए एक्शन प्लान बनाने को कहा था. वकील अर्पित भार्गव ने जनहित याचिका दायर की है कि दिल्ली की इमारतें भूकंपरोधी नहीं हैं. अगर यहां भूकंप आया तो बड़े स्तर पर जानमाल का नुकसान होगा. कोर्ट भी पिछली कई सुनवाइयों में कह चुका है कि तबाही सरकार की नीतियों का इंतजार नहीं करेगी, लेकिन हाईकोर्ट की इस तरह की टिप्पणियों के बाद भी अब तक केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार भूकंप के मामले में कुछ ठोस क़दम नहीं उठा पाई है.
कोर्ट पिछली सुनवाई में भी दिल्ली और केंद्र सरकार से पूछ चुकी है कि दोनों सरकारों ने भूकंप रोधी इमारतों के लिए क्या प्लान बनाया है. कोर्ट ने एनडीएमसी को फटकार लगाते हुए कहा कि क्या एनडीएमसी अगले भूकंप आने का इंतजार कर रही है.
कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा की अवैध कॉलोनियों को हटाने के लिए सरकार क्या कर रही है. हाईकोर्ट ने कहा यह काफी गंभीर मामला है. फिलहाल कोर्ट ने भूकंप को लेकर सरकार को फटकार तो लगा दी है, लेकिन ऐसे में यह देखना होगा कि राजधानी दिल्ली में भूकंप के होने वाले नुकसान को रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठाती है.
पूनम शर्मा