छत्तीसगढ़ में महीने भर से चली आ रही शिक्षाकर्मियों की हड़ताल अचानक खत्म हो गई. बेमुद्दत हड़ताल पर चले गए शिक्षाकर्मियों ने मंगलवार से अपने कार्यस्थलों में मौजूदगी दर्ज कराना शुरू कर दिया है. राज्य के लगभग दो हजार सरकारी स्कूलों में सुबह से लेकर शाम तक शिक्षाकर्मी अपनी उपस्तिथि दर्ज कराते चले गए. इससे उम्मीद की जा रही है कि बुधवार से तमाम स्कूलों में हालात सामान्य हो जाएंगे.
पिछड़ चुका है पाठ्यक्रम
यही नहीं इन स्कूलों में पढ़ाई भी शुरू हो जाएगी. हालांकि एक माह से अधिक समय तक पढ़ाई-लिखाई नहीं होने से पाठ्यक्रम पिछड़ चुका है. ऐसे में कोर्स कैसे पूरा होगा इस बात को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ी हुई है, जिनके बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं. जनवरी और फरवरी माह में वार्षिक परीक्षाओं का दौर शुरू हो जाएगा. ऐसे में ज्यादातर बच्चों के सामने पाठ्यक्रम को अच्छी तरह से समझने की समस्या है.
रातों रात खत्म हुई हड़ताल
सोमवार रात को राज्य सरकार ने शिक्षाकर्मियों की बर्खास्तगी शुरू करने का फरमान जारी किया था. शिक्षाकर्मी संघों के लगभग 41 नेताओं को पहले ही बर्खास्त कर दिया गया था. यही नहीं इस हड़ताल को गैर कानूनी करार देते हुए तमाम शिक्षाकर्मियों की एकतरफा बर्खास्तगी तय कर दी गई थी. चौतरफा घिर जाने से शिक्षाकर्मी संगठनों में फूट पड़ गई और रातों रात उनका आंदोलन नेस्तनाबूत हो गया.
रिहा किए गए हिरासत में लिए गए शिक्षाकर्मी
हजारों शिक्षाकर्मियों ने अपने बर्खास्त नेताओं की हालत देख कर मैदान छोड़ना ही मुनासिब समझा. जो शिक्षाकर्मी नेता बर्खास्त हो चुके हैं, उन्हें दोबारा काम पर रखा जाएगा कि नहीं इस बात पर अभी फैसला नहीं हो पाया है. लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बावजूद धरना प्रदर्शन में शामिल रहे उन शिक्षाकर्मियों को रिहा कर दिया गया है, जिन्हें पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया था. ऐसे शिक्षाकर्मियों की संख्या करीब दस हजार बताई जा रही है. गौरतलब है कि समान काम और समान वेतन की मांग को लेकर राज्य के लगभग डेढ़ लाख शिक्षाकर्मी हड़ताल पर चले गए थे.
सुनील नामदेव / सुरभि गुप्ता