नक्सलियों की फंडिंग रोकने को गृह मंत्रालय की नई रणनीति, खास फोर्स का किया गठन

टास्क फोर्स में ईडी, सीबीआई, सीबीडीटी, डीआरआई और एनआईए को शामिल किया गया है. गृह मंत्रालय ने यह भी तय किया है कि एनआईए के अंदर एक अलग नक्सल विंग बनाया जाए, जिससे नक्सलियों की साजिश और उनकी गतिविधियों की जांच फुलफ्रूफ तरीके से की जा सके.

सांकेतिक तस्वीर
जितेंद्र बहादुर सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 07 मई 2018,
  • अपडेटेड 6:31 PM IST

नक्सलियों की फंडिंग की रीढ़ तोड़ने के लिए गृह मंत्रालय ने नया एक्शन प्लान तैयार कर लिया है. गृह मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक इसके लिए मल्टी डिसिप्लिनरी टास्क फोर्स का गठन किया गया है.

इस टास्क फोर्स में ईडी, सीबीआई, सीबीडीटी, डीआरआई और एनआईए को शामिल किया गया है. गृह मंत्रालय ने यह भी तय किया है कि एनआईए के अंदर एक अलग नक्सल विंग बनाया जाए, जिससे नक्सलियों की साजिश और उनकी गतिविधियों की जांच फुलफ्रूफ तरीके से की जा सके.

इस टास्क फोर्स के जिम्मे नक्सल फंडिंग को पूरी तरह से रोकने का काम दिया गया है. यही नहीं गृह मंत्रालय नक्सल के टॉप कमांडर्स की संपत्ति और उसके श्रोत का डोजियर भी तैयार कर रही है ताकि टॉप नक्सलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके.

नक्सलियों ने कमाए पैसे

जानकारी के मुताबिक इस मामले में गृह मंत्रालय ने काफी काम कर दिया है. गृह मंत्रालय की नक्सल विंग को मिली रिपोर्ट के मुताबिक नक्सलियों के कमांडरों ने उगाही, लेवी, तेंदू पत्ता के जरिये करोड़ों रुपये कमाए हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक नक्सली अपने बच्चों को बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने के लिए भेजते हैं. साथ ही उगाही से कमाए पैसे से आलीशान घर खरीद रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक नक्सली प्रद्युम्न शर्मा ने अपनी भतीजी का एडमिशन मेडिकल कॉलेज में कराने के लिए 22 लाख रुपये डोनेशन में दिए हैं, जबकि नक्सल कमांडर अरविंद यादव ने अपने भाई के इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिले के लिए 12 लाख रुपए का डोनेशन दिया.

ईडी ने दर्ज किए कई मामले

ऐसे कमांडरों के खिलाफ ईडी ने अब तक 4 मामले दर्ज किए है, जिसमें नक्सली संदीप यादव, प्रद्युम्न शर्मा, विनय यादव और मुसाफिर साहनी को आरोपी बनाया गया है. ईडी ने करीब डेढ़ करोड़ की इनकी संपत्ति जब्त की है. दूसरी ओर, 1 करोड़ 45 लाख नकद, 32 एकड़ जमीन, 2 बस, 11 एसयूवी कार, 2 ट्रैक्टर और एक जेसीबी मशीन भी जब्त की गई है.

दरअसल, ये सारे कदम गृह मंत्रालय और सरकार की दूसरी एजेंसियां नक्सलियों के फंडिंग को रोकने के लिए कर रही है. ताकि उनकी कार्रवाई पर नकेल कसी जा सके. इस दिशा में सरकार को बड़ी कामयाबी भी मिली.

हाल के दिनों में सरकार की कोशिश है कि जिस तरीके से रेड कॉरिडोर सिकुड़ता जा रहा है, आगे की कार्रवाई में नक्सलियों की पूरी तरह से कमर तोड़ दी जाए.

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