छत्तीसगढ़ में कुछ आईएएस और आईपीएस अफसरों ने अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराकर मिसाल पेश की है. इसी तर्ज पर अब और भी आला अफसर चल पड़े हैं. आमतौर पर सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने के मामले में आला अफसर और पूंजीपति वर्ग घबराता है, लेकिन राजनांदगांव के नगर निगम के कमिश्नर अश्विनी देवांगन ने अपनी गर्भवती पत्नी का इलाज न केवल सरकारी अस्पताल में कराया बल्कि प्रसव के लिए भी सरकारी अस्पताल को ही चुना.
राजनांदगांव के अस्पताल में उनकी पत्नी का सिजेरियन ऑपरेशन हुआ. कमिश्नर अश्विनी देवांगन के मुताबिक उन्हें और उनकी पत्नी को सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों पर भी पूरा भरोसा है. उनके मुताबिक सरकारी अस्पतालों के हालात अब पहले जैसे नहीं हैं. अब यहां भी निजी अस्पतालों की तरह सुविधाएं जुटाई जा रही हैं. उनके मुताबिक जनता को भी सरकारी अस्पतालों के प्रति अपना विश्वास बढ़ाना होगा.
दो माह पूर्व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने अपनी पुत्र वधु का प्रसव भी रायपुर के सरकारी भीमराव अंबेडकर अस्पताल में कराया था. उनके सांसद पुत्र अभिषेक सिंह की पत्नी को यहां बेटी हुई थी. इस दौरान मुख्यमंत्री रमन सिंह ने भी कहा था कि सरकारी अस्पताल भी उतने ही सुरक्षित हैं जितने की निजी अस्पताल. फिलहाल सरकारी अफसरों और बड़े नेताओं के सरकारी अस्पतालों में रुख करने से राज्य की लचर स्वास्थ्य सेवाओं में सक्रियता आएगी ऐसी उम्मीद की जा रही है.
रणविजय सिंह / सुनील नामदेव