2 दिन पहले छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 25 जवान शहीद हो गए. इन 25 जांबाज़ जवानों में 6 बिहार के थे. मंगलवार की शाम जैसे ही इन 6 जवानों का पार्थिव शरीर छत्तीसगढ़ के रायपुर से विशेष विमान के द्वारा पटना एयरपोर्ट पर पहुंचा मानो इन शहीदों को लेकर बिहार सरकार की संवेदनहीनता एक के बाद एक करके सामने आती चली गई.
एयरपोर्ट से बाहर जैसे ही इन शहीदों के पार्थिव शरीर को बाहर लाया गया, इनको एयरपोर्ट के सामने ही गाड़ियों को पार्क करने की जगह पर श्रद्धांजलि दी गई. उसके बाद चौंकाने वाली बात यह रही कि इन शहीदों के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने के लिए का कोई भी मंत्री नहीं आया.
ऐसे में रही सही कसर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूरी कर दी. गौरतलब है कि जब शहीदों का पार्थिव शरीर पटना एयरपोर्ट पर पहुंचा और उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही थी उसी वक्त नितीश कुमार एयरपोर्ट से साथ लगी हुई पथ बिहार राज्य पथ विकास प्राधिकरण के दफ्तर में प्राधिकरण का आठवां स्थापना दिवस कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे. सवाल ये उठ रहे हैं आखिर मुख्यमंत्री को इतनी फुर्सत भी नहीं मिली कि चंद कदम पर स्थित पटना एयरपोर्ट जाकर दे सकें ? अगर इतना काफी नहीं था तो आगे सुनिए फिर क्या हुआ. शहीदों के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव पहुंचाने के लिए अलग-अलग गाड़ियों में चढ़ाया गया और जैसे ही यह गाड़ियां पटना एयरपोर्ट से बाहर आने ही वाली थी कि उन्हें रोक दिया गया. कारण यह की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कार्यक्रम समाप्त हो चुका था और वह कार्यक्रम स्थल से निकलकर अपने घर जा रहे थे. मुख्य मंत्री का काफिला पटना एयरपोर्ट के सामने से गुजर रहा था और इसी वजह से शहीदों की गाड़ियों को एयरपोर्ट के अंदर ही कुछ मिनट के लिए रोक दिया गया.
पटना एयरपोर्ट पर कुछ देर के लिए जिस तरीके से सुकमा के शहीदों के साथ बर्ताव किया गया उससे बिहार सरकार की काफी किरकिरी हो रही है. भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी और केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव नीतीश कुमार पर संवेदनहीन होने का आरोप लगा रहे हैं.
रोहित कुमार सिंह