मुश्किल में फंसे 'लव गुरु' मटुक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब पत्नी को देना होगा गुजाराभत्ता

निचली अदालत के आदेश का पालन करते हुए मटुकनाथ को अब दिसंबर 2018 तक बकाया राशि 8.5 लाख जमा कराना होगा. तीन हफ्ते के भीतर दोनों को एक-दूसरे के खिलाफ दाखिल केसों को वापस लेना होगा. इसके बाद दोनों एक-दूसरे पर कोई दावा नहीं करेंगे.

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मटुकनाथ और जूली (फाइल फोटो) मटुकनाथ और जूली (फाइल फोटो)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 17 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 9:29 PM IST

कुछ साल पहले 'लव गुरु' के नाम से मशहूर हुए पटना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मटुकनाथ का अपनी पत्नी को छोड़ना काफी महंगा पड़ने वाला है. सुप्रीम कोर्ट ने मटुकनाथ की पत्नी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए गुजाराभत्ता देने का आदेश दे दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अपनी पत्नी आभा को वेतन का एक तिहाई हिस्सा बतौर रखरखाव देंगे. रिटायर होने के बाद पेंशन का भी एक तिहाई हिस्सा आभा को मिलेगा. कोर्ट ने ये भी कहा कि मटुकनाथ का विभाग सीधे ही इस रकम को काट कर पत्नी के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर सकता है. कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत का फैसला बिल्कुल सही है.

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निचली अदालत के आदेश का पालन करते हुए मटुकनाथ को अब दिसंबर 2018 तक बकाया राशि 8.5 लाख जमा कराना होगा. तीन हफ्ते के भीतर दोनों को एक-दूसरे के खिलाफ दाखिल केसों को वापस लेना होगा. इसके बाद दोनों एक-दूसरे पर कोई दावा नहीं करेंगे.

मटुकनाथ पटना यूनिवर्सिटी में हिंदी के प्रोफेसर हैं. मटुक अपनी उम्र से 30 साल छोटी छात्रा के साथ 'लिव इन' में हैं. मटुक ने अपनी पत्नी को 2004 में छोड़ दिया था. उनकी पत्नी आभा पिछले 10 सालों से अपने हक के लिए लड़ रही हैं ताकि उनको गुजारा भत्ता मिल सके.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया सहारा

इससे पहले पिछली सुनवाई में पटना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर की पत्नी को सुप्रीम कोर्ट ने सलाह देते हुए कहा था कि ऐसे व्यक्ति के साथ संबंध न रखें, जो आपकी परवाह नहीं करता. कोर्ट ने मटुकनाथ की पत्नी आभा से कहा कि हम आपके हितों की रक्षा करेंगे. आप जैसे लोग समाज के लीडर बन सकते हैं. आप जैसे लोगों को प्रताड़ित नहीं होना चाहिए बल्कि मजबूती से लड़ना चाहिए.

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सुप्रीम कोर्ट ने की पत्नी को कहा कि आप बदनामी क्यों सहेंगी. ये व्यक्ति केस को अगले 10 सालों तक खींचने की कोशिश करेगा. जब ये रिटायर्ड हो जाएगा तो आपसे पीछा छुड़ाना चाहेगा.

सुप्रीम कोर्ट मटुकनाथ की याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिन्होंने पटना हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी. पटना हाईकोर्ट ने मटुकनाथ को 25 हजार रुपये गुजारा भत्ता और घरेलू उत्पीड़न के लिए देने का आदेश दिया था.

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