अनलॉक 1.0 में मिली रियायत के बाद बिहार में सार्वजनिक परिवहन की सेवा शुरू तो हो गई मगर एक शहर से दूसरे शहर जाने के दौरान बसों में सामाजिक दूरी के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.
पिछले दो दिनों में बिहार के कई शहरों से ऐसी तस्वीरें आई हैं जहां पर बस स्टैंड पर बेतहाशा भीड़ इकट्ठा हो गई है और सोशल डिस्टेंसिंग और दो गज की दूरी वाले नियम ध्वस्त हो गए.
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2 गज की दूरी का पालन नहीं
बिहार में एक बार फिर से लोग बसों की छत पर यात्रा कर रहे हैं. बस की छतों पर यात्रा के दौरान एक दूसरे से 2 गज की दूरी बनाए रखना असंभव सा है.
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बसों में बैठने के लिए सीट नहीं
बसों के अंदर भी यात्रा के दौरान किस तरीके से सामाजिक दूरी बनाई जाए इसको लेकर भी लोगों में कोई जागरूकता नजर नहीं आ रही है. अगर बस में कम सवारियां बैठती हैं तो सफर महंगा हो जाएगा, और सवारी ज्यादा बैठती है तो कोरोना के खिलाफ जंग की मुहिम कमजोर पड़ जाएगी. इस कशमकश के बीच महीनों से फंसे लोग जैसे-तैसे यात्रा करने को मजबूर हैं. आपाधापी की इस यात्रा में कोरोना संक्रमण के फैलने का अंदेशा है.
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बच्चे भी बस की छत पर बैठने को मजबूर
बिहार के गया में रेलवे स्टेशन से चलकर पटना आने वाली बसों में यात्रियों को ठूसकर भरा जाता है. इनमें से अधिकतर प्रवासी मजदूर हैं जो देश के विभिन्न हिस्सों से वापस बिहार आए हैं. इन बसों में हद तो तब हो जाती है जब बस की छत पर छोटे-छोटे बच्चों को भी यात्रा करने पर मजबूर किया जाता है.
रोहित कुमार सिंह