नीतीश पर बरसे मांझी, 'विशेष राज्य के दर्जे की मांग एक छलावा'

बता दें कि बीजेपी से अलग होकर लोकसभा चुनाव लड़ने वाले नीतीश कुमार ने कम सीटें आने पर मांझी को मुख्यमंत्री की गद्दी पर बैठाया था, नीतीश ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था और कुर्सी मांझी को ताज सौंपी दी थी.

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जीतनराम मांझी (फाइल फोटो) जीतनराम मांझी (फाइल फोटो)

देवांग दुबे गौतम

  • पटना,
  • 31 मई 2018,
  • अपडेटेड 5:05 PM IST

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और 'हम' पार्टी के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर बड़ा बयान दिया है. मांझी ने कहा, 'नीतीश कुमार का बिहार को विशेष राज्य के दर्जे की मांग एक छलावा है और वो अपना कद बड़ा दिखाना चाहते हैं.'

मांझी ने कहा, 'नीतीश पिछले 10 महीने में क्यों नहीं बोले, बीजेपी के साथ जाने से पहले शर्त क्यों नहीं रखे. कुछ खटपट है तो अब बाहर भागने का तरीका ढूंढ रहे हैं, वो लोगों को भ्रमित कर रहे हैं.'  उन्होंने कहा, 'नरेन्द्र मोदी द्वारा डीएनए पर टिप्पणी करने पर जो लाखों लोगों का नाखून-बाल लेकर गए थे वो कहां रखवाए हैं.'

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बता दें कि बीजेपी से अलग होकर लोकसभा चुनाव लड़ने वाले नीतीश कुमार ने कम सीटें आने पर मांझी को मुख्यमंत्री की गद्दी पर बैठाया था, नीतीश ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था और कुर्सी मांझी को ताज सौंपी दी थी.

नीतीश 9 महीने बाद मांझी को हटाकर फिर मुख्यमंत्री बनें. इसके बाद नीतीश आरजेडी से गठबंधन कर 2015 का विधानसभा चुनाव लड़ें और जीत हासिल की. 2015 विधानसभा चुनाव के दौरान मांझी बीजेपी के साथ थे, लेकिन पिछले साल जब नीतीश कुमार एक बार फिर बीजेपी के साथ आए तो मांझी आरजेडी के खेमे में चले गए.

बीजेपी पर भी किया हमला

बिहार के पूर्व सीएम मांझी का हमला नीतीश तक ही सीमीत नहीं रहा. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर भी तीखा वार किया. कभी बीजेपी की तारीफों के पूल बांधने वाले मांझी ने कहा, 'बीजेपी पूरे हिंदुस्तान में भगवाकरण करना चाह रही है. मांझी ने कहा, 'रामनवमी के पहले भी पूरे बिहार में ट्रक से तलवार बांटी गई. बीजेपी धार्मिक उन्माद पैदा फैला रही है.'  

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उन्होंने आगे कहा, 'बीजेपी के खिलाफ एससी, एसटी, मुस्लिम गोलबंद हुए हैं, इसलिए हम लोगों ने जहानाबाद और अररिया चुनाव जीते हैं.'

बता दें कि विशेष राज्य के दर्जे के तहत राज्य सरकार को केंद्र की तरफ से फंड दिया जाता है और कुछ अन्य सुविधाएं भी दी जाती हैं. विशेष दर्जा मिलने के बाद किसी योजना में केंद्र से मिलने वाली राशि बढ़ जाती है. ये अनुपात 90:10 होता है, जिसमें 90 फीसदी केंद्र सरकार की ओर से दिया जाता है.

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