बिहार सरकार की अहम बैठकों में अब अधिकारी अपना मोबाइल फोन लेकर नहीं जा सकेंगे. इसको लेकर राज्य सरकार ने गुरुवार(4 अक्टूबर) को एक फरमान जारी किया है. इसमें यह निर्देश दिया गया है कि ऐसी कोई भी बैठक जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, किसी भी विभाग का मंत्री, मुख्य सचिव या विकास आयुक्त करते हैं तो ऐसी बैठकों में अधिकारियों के मोबाइल फोन लेकर जाने पर रोक लगा दी गई है.
दरअसल, पिछले कुछ वक्त के दौरान नीतीश कुमार ने इस बात को देखा है कि हाई लेवल मीटिंग में आने वाले अधिकारी ज्यादा वक्त अपने मोबाइल फोन पर ही व्यस्त रहते हैं. उन्होंने पाया है कि मीटिंग के दौरान अधिकारियों के मोबाइल फोन लगातार बजते रहते हैं जिससे कि मीटिंग के सुचारू रूप से संचालन में दिक्कत आती है.
सबसे ताजा मिसाल गुरुवार को समाप्त हुए 15वें वित्त आयोग की बैठक के दौरान देखने को मिली. इस महत्वपूर्ण बैठक में 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एन के सिंह समेत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल हुए. बैठक में बिहार को विशेष केंद्रीय सहायता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत हो रही थी मगर इस दौरान कई अधिकारियों के फोन बज रहे थे और वह मोबाइल पर बातचीत करने में मशगूल दिखे.
अधिकारियों के इस हरकत से नीतीश कुमार इतने नाराज हुए कि शाम होते-होते सरकार के प्रधान सचिव आमिर सुभानी की तरफ से एक सरकारी आदेश जारी किया गया जिसमें कहा गया कि आइंदा से ऐसी कोई भी बैठक जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री, विभाग के मंत्री, मुख्य सचिव या विकास आयुक्त करेंगे ऐसी बैठकों में अधिकारियों के मोबाइल फोन लेकर जाने पर पाबंदी लगाई गई है.
प्रधान सचिव आमिर सुभानी की तरफ से यह पत्र सभी विभाग के प्रधान सचिव और सचिव, विकास आयुक्त और पुलिस महानिदेशक को भेजा गया है. इस पत्र में फरमान जारी किया गया है कि इस फैसले को तुरंत लागू किया जाए.
रोहित कुमार सिंह / देवांग दुबे गौतम