पिछले कई महीनों से विवादों में रहने वाले बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर का अब एक और नया विवादित बयान सामने आया है. उन्होंने इस्लाम धर्म के संस्थापक मोहम्मद पैगंबर को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा है. शिक्षा मंत्री ने यह बयान नालंदा में दिया है. उनका वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
दरअसल, जन्माष्टमी के मौके पर चंद्रशेखर नालंदा के हिलसा में बाबा अभय नाथ धाम परिसर में एक कार्यक्रम में शामिल होने गए हुए थे और इसी दौरान उन्होंने पैगंबर मोहम्मद साहब को मर्यादा पुरुषोत्तम बताया. अपने बयान में शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने कहा है कि ''जब शैतानियत बढ़ गई, दुनिया में ईमान खत्म हो गया, बेईमान और शैतान जारी हो गए, तो मध्य एशिया के इलाके में प्रभु ने परमात्मा ने एक शानदार पुरखा, प्रोफेट, मर्यादा पुरुषोत्तम जो भी कहलें मोहम्मद साहब को पैदा किया. इस्लाम आया ईमान लाने के लिए, इस्लाम आया बेईमानी के खिलाफ, इस्लाम आया शैतानी के खिलाफ, मगर बेईमानी वाला भी खुद को मुसलमान कहता हो तो उसकी इजाज़त कुरान नहीं देती,''
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चंद्रशेकर के बयान से आगबबूला हुई बीजेपी
चंद्रशेखर ने जैसे ही पैगंबर मोहम्मद की तुलना मर्यादा पुरुषोत्तम से कि बीजेपी इस बयान लेकर आगबबूला हो गई और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद और उनके परिवार पर हमला बोल दिया. बीजेपी ने लालू पर धर्म और जाति के नाम पर उन्माद फैलाकर वोट बटोरने का आरोप लगाया. बीजेपी प्रवक्ता अरविंद कुमार सिंह ने कहा “शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर दिमागी बीमारी के शिकार हो गए हैं. आरजेडी ना हिंदू की है ना मुसलमान की बल्कि केवल एक परिवार की है. चंद्रशेखर कभी हिंदुओं को कुछ बोलते हैं तो कभी मुसलमानों को. कभी रामायण पर टिप्पणी करता है तो कभी मोहम्मद साहब के बारे में बोलता है. यह लोग धर्म और जाति के नाम पर लड़ा कर वोट की राजनीति करते हैं और इसकी जितनी निंदा की जाए कम है.''
'रामचरितमानस' को बताया था नफरत फैलाने वाला ग्रंथ
इसी साल जनवरी महीने में बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने रामचरितमानस को लेकर विवादित बयान दिया था. इस मामले में चंद्रशेकर का जमकर विरोध हुआ था. उन्होंने कहा था कि 'रामचरितमानस' नफरत फैलाने वाला ग्रंथ है. नालंदा ओपन विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने रामचरितमानस को समाज को बांटने वाला ग्रंथ बताया था.
उन्होंने कहा था ''मनुस्मृति में समाज की 85 फीसदी आबादी वाले बड़े तबके के खिलाफ गालियां दी गईं. रामचरितमानस के उत्तर कांड में लिखा है कि नीच जाति के लोग शिक्षा ग्रहण करने के बाद सांप की तरह जहरीले हो जाते हैं. यह नफरत को बोने वाले ग्रंथ हैं." उन्होंने आगे कहा, "एक युग में मनुस्मृति, दूसरे युग में रामचरितमानस, तीसरे युग में गुरु गोवलकर का बंच ऑफ थॉट, ये सभी देश को, समाज को नफरत में बांटते हैं. नफरत देश को कभी महान नहीं बनाएगी. देश को महान केवल मोहब्बत ही बनाएगी.''
रोहित कुमार सिंह