बिहार विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही विधायकों के पाला बदलने का दौरा जारी है. विधायक आरजेडी छोड़कर जेडीयू तो कुछ नीतीश कुमार का साथ छोड़ नेता तेजस्वी यादव का हाथ थाम रहे हैं. विधायकों के दल बदल करने से उनकी राजनीतिक सेहत और संभावना पर कोई फर्क नहीं पड़ा रहा है. न तो उनकी अब सदस्यता का खतरा है और न ही वेतन की टेंशन है. यही वजह है कि विधायक बेफिक्र होकर पाला बदल रहे हैं.
नीतीश सरकार के मंत्री रहे श्याम रजक ने जेडीयू छोड़कर आरजेडी ज्वाइन कर लिया है. वहीं, आरजेडी से चार विधायकों ने पार्टी छोड़ दी है. इनमें से तीन ने जेडीयू का दामन थाम लिया है. विधानसभा चुनाव से पहले दल बदल काफी तेजी से होता है. कानून के जानकार कहते हैं कि प्रक्रिया इतनी जटिल है कि मुख्य सचेतक अगर किसी विधायक की सदस्यता खत्म करने की सिफारिश करें तो कागजी खानापूर्ति में ही 16वीं विधानसभा की मियाद खत्म हो जाएगी.
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आरजेडी के अशोक कुशवाहा को छोड़कर फिलहाल किसी भी पार्टी के किसी अन्य विधायक ने अपनी मर्जी से दल- बदल नहीं किया है. जेडीयू के एक और आरजेडी के तीन विधायक निष्कासित हुए हैं. दल से निष्कासन की कार्रवाई पहले हुई है, जिसके तहत अब वे किसी अन्य दल में शामिल हो सकते हैं. दल से निष्कासन के आधार पर किसी विधायक की सदस्यता नहीं जा सकती है. हालांकि, सदन के अंदर वे पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करें, तब सदस्यता खत्म हो सकती है.
बिहार में 16वीं विधानसभा का एक और सत्र आयोजित हो, इसकी संभावना नहीं है. लिहाजा, इन निष्कासित विधायकों पर दल-बदल से जुड़े कानून के तहत कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है. हां, नैतिकता के आधार पर ऐसे विधायक सदन की सदस्यता का त्याग कर सकते हैं. उदाहरण के तौर पर श्याम रजक ने आरजेडी ज्वाइन करने से पहले विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है.
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दरअसल, विधायकों के खिलाफ कार्रवाई तकनीकी वजह से भी संभव नहीं है. चीफ व्हिप अगर शिकायत करते हैं तो विधानसभा अध्यक्ष आवेदन की जांच करेंगे. ऐसे में संबंधित विधायक को स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा जाएगा. इसमें महीनों लग सकते हैं. तब तक नई विधानसभा गठित हो जाएगी और राजनीतिक खेल का अध्याय बंद हो जाएगा. इसीलिए काफी तेजी से विधायक दल बदल में जुटे हुए हैं.
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