अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से सैनेटाइज होने वाली पहली मेट्रो सेवा बनी लखनऊ मेट्रो

न्यूयॉर्क मेट्रो की ओर से इस प्रणाली के सफल परीक्षण के बाद इससे प्रेरणा लेते हुए उत्तर प्रदेश मेट्रो भारत में ऐसा करने वाली पहली मेट्रो सेवा बन गई है.

यू.वी. लैंप से सैनेटाइज होती लखनऊ मेट्रो
आशीष मिश्र
  • लखनऊ,
  • 29 जनवरी 2021,
  • अपडेटेड 7:08 PM IST
  • मेट्रो कोच को अस्पताल के ऑपरेशन कक्ष जितना रोगाणु-मुक्त बनाने की लखनऊ मेट्रो की अभूतपूर्व पहल
  • लखनऊ मेट्रो ने मेट्रो यात्रा के टोकन को यूवी किरणों से सैनिटाइज करने का भी सफल प्रयोग किया है
  • लखनऊ मेट्रो ने सैनिटाइजेशन उपकरण बनाने वाली एक निजी कंपनी के साथ मिलकर यू.वी. लैंप विकसित किया है

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन अल्ट्रा वॉयलेट (पराबैंगनी) किरणों से मेट्रो कोच को सैनिटाइज करने वाली भारत की पहली मेट्रो सेवा बन गई है. यात्रियों को मेट्रो से सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित कराने की दिशा में यह एक अभूतपूर्व पहल है. न्यूयॉर्क मेट्रो द्वारा इस प्रणाली के सफल परीक्षण के बाद इससे प्रेरणा लेते हुए उत्तर प्रदेश मेट्रो भारत में ऐसा करने वाली पहली मेट्रो सेवा बन गई है.

इससे पहले यूपी मेट्रो ने मेट्रो यात्रा के टोकन को यूवी किरणों से सैनिटाइज करने का भी सफल प्रयोग किया है जो कि सफलता पूर्वक जारी है. ये तकनीक यूपी मेट्रो ने खुद विकसित की थी जो कि कोविड के बाद काफी अहम तकनीक साबित हुई है. इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए अब उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूपीएमआरसी) ने पूरी ट्रेन को ही अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से सैनिटाइज करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है. लखनऊ मेट्रो ने सैनिटाइजेशन उपकरण बनाने वाली एक निजी कंपनी के साथ मिलकर यूवी लैंप विकसित किया है जो कि पराबैंगनी कीटाणुनाशक विकिरण प्रणाली पर काम करता है.

इस उपकरण में 254 नेनो-मीटर तक की शॉर्ट वेवलेंथ वाली अल्ट्रवॉयलेट-सी किरणों के जरिए सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट किया जाता है. ये किरणें इन सूक्ष्म जीवों के डीएनए व न्यूक्लीक ऐसिड को नष्ट कर इनका नाश कर देती हैं. अक्तूबर, 2020 में इस उपकरण को डीआरडीओ से मंजूरी मिली थी. वहीं, इस उपकरण को इस्तेमाल करने में कीमत भी काफी कम आती है. यूवी लैंप से सैनिटाइजेशन सोडियम हाइपोक्लोराइट की तुलना में बेहद सस्ता भी है.एक आंकड़े के मुताबिक, यूवी लैंप के जरिए सैनिटाइजेशन से लागत 40 गुना तक कम भी हो जाएगी.

यूपीएमआरसी में प्रयोग किए जा रहे इस उपकरण के जरिए 30 मिनटों में ही एक मेट्रो ट्रेन के सभी कोच सेनिटाइज किए जा सकता है. रिमोट के जरिए संचालित इस उपकरण को ऑन करने के एक मिनट बाद मशीन से रेडिएशन निकलना शुरू होता है. गौरतलब है कि चिकित्सा क्षेत्र में ऑपरेशन थियेटर को सेनिटाइज करने के लिए इसी किस्म के उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है.

यूवी सैनिटाइजेशन उपकरण के प्रयोग पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने कहा, ‘‘यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है. जब हमने यूवी रेडिएशन के जरिए टोकन सैनेटाइज करने की शुरूआत की थी, तब भी हमें यात्रियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी. अब हम पूरी ट्रेन को यूवी के जरिए सेनिटाइज करने की प्रक्रिया शुरू की है. इस नई पहल के जरिए हम जनता को एक सुरक्षित सफर का आश्वासन देते हैं."

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