स्थापना दिवस पर वंतारा ने नरेंद्र मोदी द्वारा हुए उद्घाटन को किया याद

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स्थापना दिवस के अवसर पर वंतारा ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उसका लक्ष्य वन्यजीव संरक्षण के मानकों को आगे बढ़ाना और समाज में जैवविविधता के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाना है.

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aajtak.in

  • New Delhi,
  • 03 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:57 PM IST
  • वंतारा ने कहा कि उसके स्थापनादिवस का महत्व उस दृष्टि से भी जुड़ा है, जो उद्घाटन के समय सामने रखी गई थी
  • 2 मार्च को स्थापना दिवस के रूप में मनाते हुए वंतारा ने कहा कि पारिस्थितिक संतुलन और सतत विकास पर दिया गया जोर उसके लिए प्रेरणा का स्रोत है.
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया उद्घाटन संगठित और वैज्ञानिक आधार

2 मार्च को अपने स्थापना दिवस के मौके पर वंतारा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए अपने भव्य उद्घाटन को याद किया और इसे अपनी संरक्षण यात्रा का अहम पड़ाव बताया. संस्थान ने कहा कि यह केवल एक औपचारिक शुरुआत नहीं थी, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और देखभाल के प्रतिदीर्घकालिक प्रतिबद्धता की दिशा तय करने वाला क्षण था.

 

वंतारा ने कहा कि उसके स्थापनादिवस का महत्व उस दृष्टि से भी जुड़ा है, जो उद्घाटन के समय सामने रखी गई थी. उस अवसर पर वन्यजीवों के बचाव, पुनर्वास और संरक्षण के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया गया था. संस्थान के अनुसार वही दृष्टिकोण आज भी उसके कार्यों और योजनाओं का मार्गदर्शन कर रहा है.

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2  मार्च को स्थापना दिवस के रूप में मनाते हुए वंतारा ने कहा कि पारिस्थितिक संतुलन और सतत विकास पर दिया गया जोर उसके लिए प्रेरणा का स्रोत है. संस्थान ने दोहराया कि भारत में वन्यजीव संरक्षण के लिए उन्नत पशुचिकित्सा सुविधाएं, वैज्ञानिक अनुसंधान, आवास प्रबंधन और जनजागरूकता को साथ लेकर चलना आवश्यक है, और वह इन सभी क्षेत्रों में सक्रिय है.

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया उद्घाटन संगठित और वैज्ञानिक आधार

 

पर संरक्षण प्रयासों के समर्थन का प्रतीक माना गया. वंतारा ने कहा कि उस समय मिली प्रेरणा आज भी उसके डॉक्टरों, देखभालकर्ताओं और शोधकर्ताओं को बेहतर मानकों के साथ काम करने के लिए उत्साहित करती है.

भारत में जैवविविधता संरक्षण, वनपारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा और अवैध शिकार तथा तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। वंतारा ने कहा कि वह विशेष देखभाल की जरूरत वाले जानवरों के पुनर्वास और संरक्षण अनुसंधान के माध्यम से इस राष्ट्रीय प्रयास में योगदान दे रहा है. संस्थान का मानना है कि संवेदनशीलता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का संतुलन ही स्थायी समाधान दे सकता है.

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स्थापना दिवस के अवसर पर वंतारा ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उसका लक्ष्य वन्यजीव संरक्षण के मानकों को आगे बढ़ाना और समाज में जैवविविधता के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाना है. संस्थान के अनुसार उद्घाटन का वह क्षण उसे अपने दायित्वों की लगातार याद दिलाता है.

वंतारा ने यह भी कहा कि प्रभावी संरक्षण के लिए नीति समर्थन और जनभागीदारी दोनों जरूरी हैं. संस्थान का मानना है कि जब सरकार, संस्थाएं और समाज मिलकर काम करते हैं, तभी ठोस परिणाम सामने आते हैंय

एक और वर्ष पूरा होने पर वंतारा ने 2 मार्च को केवल एक वर्षगांठ नहीं बल्कि संकल्प दिवस बताया. संस्थान ने कहा कि वह उद्घाटन के समय रखी गई संरक्षण की दृष्टि को आगे बढ़ाने और भारत के वन्यजीवों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है. अपने स्थापना दिवस पर वंतारा ने कहा कि वह अतीत की उपलब्धियों पर गर्व करते हुए भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार है.

 

संस्थान ने दोहराया कि उद्घाटन के समय मिली प्रेरणा और मार्गदर्शन उसकी संरक्षण यात्रा को निरंतर दिशा देता रहेगा.

 

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