निःशुल्क प्रवेश के साथ 20% से अधिक उपस्थिति दर्ज कर संपन्न हुआ 53वां नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026

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नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का उद्घाटन माननीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया।

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aajtak.in

  • New Delhi,
  • 19 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:26 PM IST
  • भारतीय सैन्य थीम पवेलियन आकर्षण का केंद्र
  • मजबूत वैश्विक सहभागिता से नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 को मिली नई पहचान
  • बच्चों और परिवारों पर रहा विशेष फोकस

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला के आख़िरी दिन की ढलती शाम तक भी पुस्तकों के स्टॉल्स पर पाठक-पुस्तक प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ी रही। लोग लाइनों में खड़े होकर किताबें ख़रीदते नज़र आए, अपने प्रिय लेखकों को सुनने के लिए मंचों के आसपास जगह बनाने की कोशिश करते दिखे, वहीं विभिन्न संवाद मंचों पर देश-विदेश के ख्यातिप्राप्त व्यक्तित्व अपने विचार और जीवन यात्राएँ साझा करते रहे।

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नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला का यह 53वां संस्करण विचार, संवाद और पुस्तकों के देश के सबसे बड़े उत्सव के रूप में मनाया गया। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार रिकॉर्ड संख्या में लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई। पहली बार मेले में निःशुल्क प्रवेश की सुविधा भी इस अभूतपूर्व सहभागिता का एक बड़ा कारण रही। रविवार, 18 जनवरी को यह मेला 15-20% की वृद्धि के साथ विधिवत रूप से संपन्न हुआ।

शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी), भारत द्वारा आयोजित इस नौ-दिवसीय मेले में 35 से अधिक देशों के 1,000 से अधिक प्रकाशकों ने भाग लिया। मेले के दौरान 1,000 से अधिक वक्ताओं की भागीदारी के साथ 600 से अधिक चयनित कार्यक्रम आयोजित किए गए।

विभिन्न श्रेणियों के प्रकाशकों ने बताया कि निःशुल्क प्रवेश से न केवल दर्शक संख्या में वृद्धि हुई, बल्कि पाठक वर्ग का विस्तार भी हुआ। एनबीटी की कुल बिक्री में लगभग 30% तक का सुधार देखने को मिला। कई प्रकाशकों ने यह भी महसूस किया कि पाठक अधिक सहज, जिज्ञासु और संलग्न रहे। परिवारों, छात्रों और पहली बार मेले में आने वाले आगंतुकों ने स्टॉल्स पर अधिक समय बिताया और ख़रीदारी में सक्रिय रुचि दिखाई। विशेष रूप से बाल साहित्य और सामान्य रुचि के प्रकाशकों ने सभी आयु वर्गों में निरंतर रुचि, पुस्तकों की बेहतर खोज और कुल बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि की सूचना दी।

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इस वर्ष एक नई पहल के अंतर्गत, एनबीटी (नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला के आयोजक) ने इनोवेटिव और रचनात्मक स्टॉल प्रस्तुत करने वाले विभिन्न प्रकाशकों को प्रशंसा प्रमाण पत्र प्रदान किए। इन सम्मानित संस्थानों में अतिथि देश क़तर, भारत सरकार का संस्कृति मंत्रालय, नोटियन प्रेस, राजकमल प्रकाशन, हार्पर कॉलिन्स, पेगासस और वी. के. ग्लोबल शामिल रहे।


10 से 18 जनवरी 2026 तक आयोजित नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में 35 से अधिक देशों के 1,000 से अधिक प्रकाशकों ने भाग लिया, 600 से अधिक विशेष कार्यक्रम आयोजित हुए और 1,000 से अधिक वक्ताओं ने सहभागिता की। देश-विदेश से अनुमानित 20 लाख से अधिक आगंतुकों ने मेले का दौरा किया। पाठक, छात्र, परिवार, लेखक और प्रकाशन जगत से जुड़े लोग पूरे आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिससे एक जीवंत, समावेशी और उत्सवधर्मी साहित्यिक वातावरण बना रहा।


भारतीय सैन्य थीम पवेलियन आकर्षण का केंद्र

पुस्तक मेला 2026 का एक प्रमुख आकर्षण 1,000 वर्ग मीटर में फैला थीम पवेलियन “भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं प्रज्ञा @75” रहा, जो मेले के सबसे अधिक देखे और चर्चित स्थलों में शामिल रहा। इस पवेलियन में भारतीय सैन्य इतिहास से जुड़ी 500 से अधिक पुस्तकों का प्रदर्शन किया गया तथा 100 से अधिक विशेष सत्र आयोजित हुए।

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यहाँ अर्जुन टैंक, आईएनएस विक्रांत और एलसीए तेजस की वास्तविक आकार की प्रतिकृतियाँ प्रदर्शित की गईं। साथ ही, 21 परमवीर चक्र विजेताओं के जीवन और योगदान पर आधारित विशेष प्रदर्शनियाँ भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहीं।


विभिन्न विषयों पर आधारित सत्रों में प्राचीन भारतीय युद्ध-कौशल, कारगिल युद्ध के प्रत्यक्ष अनुभव, “सैम और सगत” जैसे दो महान सैन्य नेताओं पर केंद्रित संवाद, भारतीय नौसेना की भूमिका, सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी, “1971: एक राष्ट्र के निर्माण की गाथा” तथा परमवीर चक्र विजेता मेजर राम राघोबा राणे की विरासत पर समूह चर्चाएँ शामिल रहीं। थलसेना, नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों और पूर्व सैनिकों ने नेतृत्व, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रसेवा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए।


थलसेना प्रमुख और नौसेना प्रमुख ने भी इस पवेलियन का दौरा किया। नौसेना प्रमुख ने नागरिकों से पढ़ने की आदत विकसित करने का आह्वान किया और “किंडल पीढ़ी” के युवाओं को पुस्तकों से जुड़ा देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। वहीं, थलसेना प्रमुख ने बाल पाठकों से संवाद करते हुए ज्ञान, अनुशासन और जिज्ञासा के महत्व को रेखांकित किया।


नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का उद्घाटन माननीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया। इस अवसर पर क़तर और स्पेन के संस्कृति मंत्री भी उपस्थित रहे। मेले में पधारे विशिष्ट अतिथियों में श्री अमित शाह (माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री), श्री भगवंत मान (माननीय मुख्यमंत्री, पंजाब), श्री गजेंद्र सिंह शेखावत (माननीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री), जनरल अनिल चौहान (चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ), जनरल उपेंद्र द्विवेदी (थलसेना प्रमुख), एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी (नौसेना प्रमुख), जनरल (से.नि.) वी. के. सिंह (माननीय राज्यपाल, मिज़ोरम), श्री आर. एन. रवि (माननीय राज्यपाल, तमिलनाडु), श्री एन. इंद्रसेन रेड्डी (माननीय राज्यपाल, त्रिपुरा), श्री हरिवंश नारायण सिंह (उपसभापति, राज्यसभा), डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, मेजर जनरल (डॉ.) बिपिन बख्शी, श्री सुधांशु त्रिवेदी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति शामिल रहे।
 

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मेले में शुभांशु शुक्ला, रिकी केज, स्मृति ईरानी, हेमा मालिनी, जया किशोरी, कैलाश सत्यार्थी सहित अनेक प्रतिष्ठित लेखक, विचारक और सार्वजनिक व्यक्तित्वों ने भाग लिया, जिनके सत्रों में बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।


मजबूत वैश्विक सहभागिता से नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 को मिली नई पहचान


नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में अंतरराष्ट्रीय सहभागिता एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में उभरी। इस वर्ष क़तर सम्मानित अतिथि देश और स्पेन फोकस देश रहा। इंटरनेशनल इवेंट्स कॉर्नर में साहित्यिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से जुड़े विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए।


स्पेन, ऑस्ट्रिया, यूक्रेन, ईरान, इज़राइल, जापान, तुर्की, चिली सहित 35 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों ने साहित्य, जीवनानुभव, प्रकृति और सह-अस्तित्व, स्मृति और विस्थापन, अनुवाद, बहुभाषी कविता, बाल साहित्य, रंगमंच तथा साहित्यिक अनुवाद में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नैतिकता जैसे विषयों पर संवाद किया।


स्पेनिश साहित्यिक परंपराओं, आधुनिकतावादी कविता और बहुसांस्कृतिक प्रभावों पर चर्चा हुई। स्पेनिश, बास्क, कैटलन, एस्टुरियन, बांग्ला और हिंदी में हुए बहुभाषी कविता पाठ ने भाषाई विविधता को समकालीन साहित्य की शक्ति के रूप में रेखांकित किया। क़तर के नेतृत्व में खाड़ी देशों के साथ सांस्कृतिक संवाद में साझा कथा परंपराओं और पश्चिम एशिया में भारतीय साहित्यिक व नाट्य रूपों की गूंज पर विशेष प्रकाश डाला गया। इन संवादों ने नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले को वैश्विक साहित्यिक विमर्श और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के एक सशक्त मंच के रूप में स्थापित किया।

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बच्चों और परिवारों पर रहा विशेष फोकस


बच्चे और परिवार नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 के केंद्र में रहे। बच्चों के पवेलियन “किड्ज़ एक्सप्रेस” में स्टोरीटेलिंग, रंगमंच, कला एवं शिल्प कार्यशालाएँ, क्विज़, वैदिक गणित सत्र, बुक कवर डिज़ाइन कार्यशालाएँ और बाल लेखकों से संवाद जैसे विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए।


इसके साथ ही, नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 ने सीईओस्पीक और न्यू दिल्ली राइट्स टेबल जैसी पहलों के माध्यम से 70 से अधिक भारतीय और अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों के बीच अधिकार विनिमय को बढ़ावा देते हुए एक सशक्त बी2बी मंच के रूप में भी अपनी भूमिका को मज़बूत किया।


मेले की शामें सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजी रहीं। इनमें रिकी केज, मंगणियार कलाकार, रहस्य द प्रोजेक्ट, तथा भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बैंड्स के साथ-साथ समकालीन संगीत प्रस्तुतियाँ शामिल रहीं, जिन्होंने एम्फीथिएटर में बड़ी संख्या में दर्शकों को आकर्षित किया।
 

पुस्तकों का राष्ट्रीय उत्सव संपन्न


नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का समापन माननीय प्रधानमंत्री के इस दृष्टिकोण की पुनः पुष्टि करता है कि “जब नागरिक पढ़ते हैं, तब देश आगे बढ़ता है।” मेले को मिली व्यापक जनभागीदारी, बढ़ी हुई पहुँच और सशक्त अंतरराष्ट्रीय संवाद भारत की पठन संस्कृति को एक मज़बूत ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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इस उत्साह को आगे बढ़ाते हुए, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत पाठकों, प्रकाशकों और लेखकों का स्वागत आगामी नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला में करने के लिए उत्साहित है, जो 16 से 24 जनवरी 2027 तक आयोजित होगा। आगामी संस्करण में पुस्तकों, विचारों और सांस्कृतिक संवाद का और भी समृद्ध कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा तथा प्रवेश पुनः सभी के लिए निःशुल्क रहेगा।


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