कैंसर का खतरा कम कर सकती है ये डाइट! इन चीजों को करें खाने में शामिल

कैंसर एक जानलेवा बीमारी है जिसे रोकने में सही खान-पान और लाइफस्टाइल की अहम भूमिका होती है. 4 फरवरी यानी आज वर्ल्ड कैंसर डे (world cancer day 2026) है इसलिए आज हम आपको एंटी कैंसर डाइट के बारे में बताएंगे.

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4 फरवरी को दुनियाभर में विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है. (Photo: ITG) 4 फरवरी को दुनियाभर में विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है. (Photo: ITG)

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:11 AM IST

Anti-Cancer Diet: कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो दुनिया भर में काफी तेजी से फैल रही है. इस जानलेवा बीमारी को देखते हुए हर साल 4 फरवरी को वर्ल्ड कैंसर डे मनाया जाता है जिसका उद्देश्य लोगों में इस बीमारी के लिए अवेयरनेस पैदा करना है. मेडिकल साइंस और रिसर्च यह साबित कर चुकी हैं कि कैंसर से होने वाली मौतों का एक बड़ा हिस्सा आपकी लाइफस्टाइल और खान-पान से जुड़ा होता है. दरअसल, लोग जाने अनजाने ऐसी चीजें खा रहे हैं जो शरीर में कैंसर सेल्स को पनपने का माहौल देते हैं और वो ऐसी चीजों को नजरअंदाज कर रहे हैं जो इन सेल्स को पनपने से सुरक्षा दे सकते हैं.

अगर आप अपनी डाइट और आदतों में सही बदलाव करते हैं तो इस बीमारी के जोखिम को कम किया जा सकता है. भारत सरकार की महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना की ऑफिशिअल वेबसाइट पर 'एंटी-कैंसर डाइट' के बारे में बताया गया है जो सभी को फॉलो करना चाहिए.

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प्लांट-बेस्ड डाइट लें

कैंसर से बचाव का सबसे पहला और असरदार हथियार है, पौधों से मिलने वाले भोजन पर भरोसा करें. रिसर्च के मुताबिक, प्लांट बेस्ड डाइट भोजन में फैट कम, फाइबर अधिक और कैंसर से लड़ने वाले पोषक तत्व भरपूर होते हैं. यह आपके इम्यून सिस्टम को इतना मजबूत बना देते हैं कि आपका शरीर खुद कैंसर की कोशिकाओं से मुकाबला करने लगता है.

सभी लोग कोशिश करें कि आपकी थाली का कम से कम दो-तिहाई हिस्सा साबुत अनाज, सब्जियों, फलियों या फलों से भरा हो. इसका मतलब यह नहीं कि आप पूरी तरह शाकाहारी बन जाएं बल्कि फोकस 'होल फूड्स' पर होना चाहिए.

फाइबर इंटेक बढ़ाएं

फाइबर आपके पाचन तंत्र को साफ और स्वस्थ रखता है. यह शरीर से उन जहरीले तत्वों को बाहर निकाल फेंकता है जो आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकते हैं. फाइबर के लिए सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस और व्हाइट ब्रेड की जगह होल-ग्रेन ब्रेड का सेवन करें. फल और सब्जियां हमेशा छिलके के साथ खाने की कोशिश करें क्योंकि असली फाइबर वहीं होता है .

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नॉनवेज और फैट कम खाएं

रिसर्च बताती हैं कि जो लोग नॉनवेज का सेवन नहीं करते हैं, उनमें कैंसर का खतरा नॉनवेज खाने वालों के मुकाबले करीब 50 प्रतिशत तक कम होता है. नॉनवेज में फाइबर कम और सैचुरेटेड फैट अधिक होता है जो इसे खतरनाक बना देता है. अगर आप मीट खाना ही चाहते हैं तो इसे अपनी डाइट का मुख्य हिस्सा बनाने के बजाय साइड डिश के तौर पर खाएं.

फैट खाने में भी ध्यान दें. सैचुरेटेड और ट्रांस फैट (जैसे डालडा, मक्खन या प्रोसेस्ड फूड) कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं इसलिए इनकी जगह ऑलिव ऑयल या कनोला ऑयल इस्तेमाल करें. ओमेगा-3 फैटी एसिड के लिए अपनी डाइट में अखरोट, अलसी के बीज और मछली शामिल करें .

एंटी-ऑक्सीडेंट्स और मसालों का सेवन करें

कैंसर से लड़ने के लिए आपकी प्लेट जितनी रंगीन होगी, आप उतने ही सुरक्षित रहेंगे. रंगीन फल और सब्जियां फाइटोकेमिकल्स और एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती हैं जो शरीर की कोशिकाओं को डैमेज होने से बचाती हैं. इसके अलावा हमारी रसोई के मसाले जैसे लहसुन, अदरक, हल्दी और करी पाउडर न सिर्फ स्वाद बढ़ाते हैं बल्कि ये कैंसर सेल्स से भी लड़ते हैं.

खाना पकाने का तरीका भी है अहम

सिर्फ सही खाना ही काफी नहीं बल्कि उसे पकाने का तरीका भी मायने रखता है. सब्जियों को ज्यादा देर तक उबालने या पकाने से उनके विटामिन्स खत्म हो जाते हैं, इसलिए उन्हें हल्का स्टीम करना सबसे बेहतर है.

नॉनवेज को ज्यादा तापमान पर भूनने या सीधे आग पर पकाने से उसमें कैंसर पैदा करने वाले तत्व बन जाते हैं इसलिए तलने या ग्रिल करने के बजाय बेकिंग या बॉइलिंग जैसे तरीकों को अपनाना सेहतमंद है.

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