चाय, कॉफी और गर्म खाने के लिए पेपर प्लेट और कप क्यों खतरनाक? डॉक्टर ने गिनाए खतरे

अक्सर मार्केट में पेपर, प्लास्टिक के कप और प्लेट में खाना दिया जाता है लेकिन ये सुरक्षित ऑपशंस क्यों नहीं हैं इस बारे में डॉक्टर का क्या कहना है, रिसर्च क्या कहती हैं, इस बारे में जानेंगे.

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पेपर कप में चाय-कॉफी पीना सुरक्षित नहीं होता. (Photo: ITG) पेपर कप में चाय-कॉफी पीना सुरक्षित नहीं होता. (Photo: ITG)

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 22 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:34 PM IST

जब भी आप मार्केट में कुछ खाना खाने जाते हैं तो अक्सर प्लास्टिक या पेपर के डिस्पोजेबल प्लेट-कप में दिया जाता है. ये सिंगल यूज के लिए बने होते हैं और इन्हें इजी टू यूज माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं सड़क किनारे चाय की दुकानों, ऑफिसों और होटलों में प्रयोग किए जा रहे ये डिस्पोजेबल प्लेट और कप आपके लिए सुरक्षित नहीं है. डॉक्टर्स के मुताबिक, गर्मी के संपर्क में आने पर ये डिस्पोजेबल प्रोडक्ट प्लास्टिक के समान ही कई खतरे पैदा कर सकते हैं.

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डिस्पोजेबल प्लेट-कप किससे बनते हैं?

डिस्पोजेबल कप और प्लेट देखने में भले ही कागज जैसे लगते हों लेकिन वो पूरी तरह से कागज के नहीं बने होते. उन्हें वॉटर रेजिस्टेंस बनाने के लिए मेकर्स उन पर पतली प्लास्टिक की परत चढ़ाते हैं जो दिखाई नहीं देती. ये परत आमतौर पर पॉलीइथिलीन (PE) या इसी तरह के अन्य पॉलिमर से बनी होती है. ये परतें तरल पदार्थों को बहने से रोकती हैं लेकिन साथ ही कागज के कप-प्लेट्स को प्लास्टिक की परत के सीधे संपर्क में ले आती है जो काफी नुकसानदायक है.

जब गर्म चाय, कॉफी या ताजा पका हुआ भोजन प्लास्टिक की कोटिंग वाले इन डिस्पोजल के संपर्क में आता है तो वो परत नर्म होकर गलने लगती है. इससे 2 प्रक्रियाएं तेज हो जाती हैं. पहला सूक्ष्म प्लास्टिक रिलीज होने लगती है और कैमिकल भोजन या ड्रिंक्स में मिलना शुरू हो जाते हैं.

क्या कहते हैं डॉक्टर्स

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अहमदाबाद के कार्डियोवैस्कुलर और थोरेसिक सर्जन डॉ. भूपेश शाह के मुताबिक, डिस्पोजल कप से सूक्ष्म प्लास्टिक के कण निकलते हैं जो आमतौर पर दिखाई नहीं देते लेकिन इनके बार-बार संपर्क में आने से आपके शरीर को नुकसान हो सकता है. प्लास्टिक की ये परतें और चिपकने वाले पदार्थ अधिक तापमान पर पिघलकर खाने में मिल जाते हैं.'

डॉ. शाह कहते हैं, 'भोजन और गर्म ड्रिंक्स में घुलने वाले सूक्ष्म प्लास्टिक शरीर में प्रवेश कर सकते हैं. ये अंगों में जमा हो सकते हैं, आंतों की परत में जलन पैदा कर सकते हैं और शरीर के कामों में रुकावट पैदा कर सकते हैं. रिसर्च बताती हैं कि सूक्ष्म प्लास्टिक के संपर्क में आने से आंतों में सूजन, माइक्रोबायोम में गड़बड़ी और इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है.'

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