भारत में क्यों बढ़ रहा ओरल कैंसर? ICMR ने बताया कारण, दी चेतावनी

भारत में पुरुषों में मुंह का कैंसर लगातार बढ़ रहा है, जबकि दुनिया के ज्यादातर अमीर देशों में यह धीमा पड़ रहा है. समय पर जांच और लाइफस्टाइल में सुधार से इस खतरे को कम किया जा सकता है.

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ICMR की स्टडी में चौंकाने वाली बात सामने आई है. (Photo: ITG) ICMR की स्टडी में चौंकाने वाली बात सामने आई है. (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 29 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:16 PM IST

कैंसर आज के समय में काफी अधिक बढ़ रहा है. ICMR और ग्लोबोकैन जैसे अंतरराष्ट्रीय डेटाबेस के अनुसार, जहां एक ओर 1990 से 2019 के बीच भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में लगभग 21 प्रतिशत और मृत्यु दर में लगभग 32 प्रतिशत की कमी देखी गई है, वहीं नई स्टडी में दावा किया गया है अर्जेंटीना, चीन, जर्मनी, इटली, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, तुर्की और अमेरिका की अपेक्षा भारत के पुरुषों में मुंह के कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं.

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की नई रिपोर्ट बताती है कि 1998–2017 के बीच पुरुषों में ओरल कैंसर की घटनाएं हर साल लगभग 1.20 प्रतिशत की दर से बढ़ी हैं यानी हर साल नए मरीजों की संख्या पहले से अधिक बढ़ रही है. 

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आंकड़े क्या कहते हैं

जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ में पब्लिश स्टडी से पता चलता है कि भारत में अब ब्रेस्ट कैंसर और पुरुषों में मुंह के कैंसर, दोनों ही लगातार बढ़ रहे हैं जबकि दुनिया के अधिकतर अमीर देशों में ओरल कैंसर की रफ्तार या तो थमी है या धीमी हो रही है.

उम्र से जुड़े आंकड़े दिखाते हैं कि भारत में पुरुषों और महिलाओं में ओरल कैंसर की दर 40 साल तक के लोगों में लगभग बराबर होती है लेकिन 40 के बाद पुरुषों की रफ्तार तेजी से बढ़ जाती है. अन्य रिसर्च बताती है कि भारत में ओरल कैंसर की औसत दर प्रति 1 लाख में लगभग 10.4 है लेकिन पुरुषों में यह दर महिलाओं से अधिक होती है. खासकर ये दर उत्तर-पूर्व, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में ज्यादा कॉमन है.

ICMR-NINE के अनुमानों के अनुसार, भारत में 2024 में कैंसर के 15 लाख नए मामले और 8 लाख 74 हजार 404 मौतें दर्ज की गईं और मौजूदा रुझान जारी रहने पर 2045 तक प्रति वर्ष 24.6 लाख मामले होने का अनुमान है. अकेले पुरुषों में 2024 में मुख कैंसर के 1लाख 13 हजार से अधिक नए मामले सामने आने की आशंका है. GLOBOCAN के अनुसार, ग्लोबल लेवल पर 2022 में लगभग 2 करोड़ नए कैंसर के मामले और 97 लाख मौतें दर्ज की गईं.

खतरे के मुख्य कारण क्या हैं?

ओरल कैंसर के पीछे सबसे बड़ा हाथ तंबाकू का है. अब चाहे सिगरेट हो, बीड़ी हो, गुटखा-पान हो या कोई भी स्मोकलेस प्रोडक्ट. इसके साथ-साथ शराब का सेवन, बेटल क्विड (पान–सुपारी–तंबाकू मिश्रण) और कुछ मामलों में एचपीवी (HPV) वायरस भी जोखिम बढ़ाते हैं. रिसर्च बताती है कि भारत में ओरल कैंसर की सबसे आम फॉर्म स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा है, जो कुल मामलों का 90 फीसदी से ज्यादा शेयर करती है.

आईसीएमआर-नाइन के डायरेक्टर डॉ. प्रशांत माथुर ने कहा, 'भारत के पुरुषों में, मुंह का कैंसर एक गंभीर और लगातार बनी रहने वाली स्वास्थ्य समस्या है. इसका मुख्य कारण लगातार तंबाकू का सेवन है. खासकर गुटखा, पान और खैनी जैसे धुआं रहित तंबाकू, साथ ही शराब का सेवन और सुपारी चबाना. ऐसी आदतें अक्सर बचपन में ही शुरू हो जाती हैं और सामाजिक रीति-रिवाजों में गहराई से समाई होती हैं.'

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बचाव और इलाज

डॉक्टरों की राय है कि मुंह के कैंसर से बचने का सबसे बड़ा तरीका है, तंबाकू और शराब का पूरी तरह छुटकारा. इसके अलावा नियमित मुंह की जांच, किसी भी दरार, छाले या धब्बे को नजरअंदाज न करना, समय पर डेंटिस्ट या ओंकोलॉजिस्ट से जांच कराना बहुत जरूरी है. विश्व स्तरीय रिसर्च इस बात पर जोर देती है कि भारत जैसे देशों के लिए ग्रु-बेस्ड स्क्रीनिंग, जन‑जागरूकता और तंबाकू नियंत्रण से ओरल कैंसर का बोझ काफी कम किया जा सकता है.

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