आजकल वजन घटाने और डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए बहुत से लोग ओजेम्पिक और वेगोवी जैसी GLP-1 दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. पूरी दुनिया में लोगों के बीच इन दवाओं का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. इन दवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोगों का वजन तेजी से कम होने लगता है, जिसे देखकर वो बहुत खुश होते हैं. लेकिन इसके साथ ही कुछ ऐसा भी होता है, जो उन्हें चिंता में डाल देता है. अब सवाल ये उठता है कि आखिर इन दवाओं को लेने से ऐसा क्या हो रहा है?
तो बता दें, GLP-1 दवाएं वजन तो काफी जल्दी कम कर देती हैं, लेकिन इसका एक अजीब साइड देखने को मिल रहा है, जो सीधे चेहरे के लुक से जुड़ा है. कई लोगों का कहना है कि वजन घटने के साथ-साथ उनके गाल पिचकने लगे हैं, चेहरे पर झुर्रियां पहले से ज्यादा साफ दिखने लगी हैं और वो उम्र से ज्यादा बड़े नजर आने लगे हैं. कई लोग वजन घटने से खुश हैं, लेकिन चेहरे पर आए इस बदलाव ने उन्हें सोच में डाल दिया है.
क्या है ‘GLP-1 फेस’?
वजन घटाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली GLP-1 दवाएं भूख को कम करती हैं, जिससे व्यक्ति कम खाना खाता है और शरीर का फैट तेजी से घटने लगता है. हालांकि वजन कम होना सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसका असर चेहरे पर भी साफ दिखाई देने लगता है. जब शरीर का फैट कम होता है, तो चेहरे का फैट भी कम होने लगता है.
चेहरे का यही फैट स्किन को भरा-पूरा और टाइट बनाए रखने में मदद करता है. लेकिन GLP-1 दवाओं के कारण जब ये फैट तेजी से घटता है, तो लोगों के गाल पिचक जाते हैं और चेहरे की शेप भी बदल जाती है. चेहरे की फैट कम होने की वजह से कई बदलाव नजर आने लगते हैं, जैसे- गाल ढीले और लटके हुए दिखाई देने लगते हैं, झुर्रियां पहले से ज्यादा गहरी नजर आने लगती हैं, चेहरा थका-थका, बेजान और उम्र से ज्यादा बड़ा दिख सकता है. वजन घटाने GLP-1 दवाओं के इस्तेमाल के बाद चेहरे में दिखने वाले इन बदलावों को ही लोग अब ‘GLP-1 फेस’ या ओजेम्पिक फेस कहा जा रहा है. हालांकि, ये केवल वेट लॉस ड्रग्स ही नहीं बल्कि किसी भी स्ट्रिक्ट डाइट या रुटीन से हुए वेट लॉस के बाद भी होता है.
लुक की चिंता में लोग छोड़ रहे हैं दवा
वजन घटाने वाली दवाइयों से चेहरे पर पड़ने वाले असर को लेकर लोग काफी परेशान हैं. न्यूयॉर्क के मशहूर प्लास्टिक सर्जन डॉ. कॉन्स्टेंटिन वास्यूकेविच का कहना है कि ये मामला सिर्फ खूबसूरती और लुक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर इलाज पर भी पड़ रहा है.
डॉ. कॉन्स्टेंटिन के मुताबिक, कई मरीज जब अपने चेहरे में अचानक आए बदलाव देखते हैं तो वो बहुत ज्यादा परेशान हो जाते हैं. इस वजह से कुछ लोग दवा की मात्रा खुद ही कम करने लगते हैं, जबकि कई लोग दवा पूरी तरह छोड़ने का फैसला कर लेते हैं. वहीं कई लोग एस्थेटिक सर्जरी कराने के लिए परेशान हो जाते हैं.
कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट भी बन रहा है वजह
डॉ. कॉन्स्टेंटिन ने ये भी बताया कि खासतौर पर वे मरीज ज्यादा चिंता में आ जाते हैं, जिन्हें लगता है कि चेहरे को फिर से पहले जैसा करने के लिए वो कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट नहीं करा पाएंगे. दरअसल, कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट्स बहुत महंगे होते हैं और इन्हें कराना हर किसी के बस की बात नहीं है. ऐसे में लुक की चिंता उनके इलाज पर भारी पड़ जाती है, जो सेहत के लिहाज से सही नहीं है.
मानसिक स्थिति भी जरूरी
डॉ. कॉन्स्टेंटिन के मुताबिक, किसी भी दवा के लिए मरीज क्या सोच रहा है वो इलाज में बहुत अहम भूमिका निभाता है. अगर किसी इंसान को ये डर सताने लगे कि दवा लेने से उसका चेहरा या लुक खराब हो जाएगा, तो वो दवा चाहे कितनी ही जरूरी क्यों न हो, उसे लेने से कतराने लगता है.
कई बार ये चिंता इतनी बढ़ जाती है कि लोग अपने इलाज को ही नजरअंदाज करने लगते हैं. इसी वजह से हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि लुक से जुड़ी चिंता को हल्के में लेना बड़ी गलती हो सकती है. इसका असर सिर्फ कॉनफिडेंस पर ही नहीं, बल्कि सीधे तौर पर सेहत और इलाज पर भी पड़ता है. इसलिए इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि इलाज के दौरान शारीरिक बदलावों के साथ-साथ मानसिक सेहत का भी पूरा ध्यान रखा जाए.
किन लोगों के चेहरे पर ज्यादा दिखता है असर?
हर किसी को GLP-1 फेस की समस्या नहीं होती. लेकिन कुछ लोग होते हैं जिनके चेहरे पर असर दिखने का खतरा ज्यादा रहता है. उनमें
वहीं, 30 की उम्र के आसपास के लोगों में यह असर कम देखने को मिलता है.
मेडिकेशन के दौरान डॉक्टर्स का होना क्यों जरूरी?
इलाज के दौरान डॉक्टर की सलाह और सही जानकारी बहुत जरूरी होती है. अगर डॉक्टर पहले ही मरीज को इन दवाओं से होने वाले बदलावों के बारे में साफ-साफ बता दें, तो मरीज मानसिक रूप से इसके लिए तैयार रहता है. इससे मरीज को अचानक बदलाव देखकर घबराहट नहीं होती और वह इलाज को बीच में छोड़ने के बारे में नहीं सोचता.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क