पिछले कुछ सालों में दुनिया ने कोरोना महामारी का सामना किया जिसने हर देश, हर समाज और हर व्यक्ति की जिंदगी को बदलकर रख दिया. लॉकडाउन, खाली सड़कें, अस्पतालों में बढ़ता दबाव और लोगों की जिंदगी में आए अचानक बदलाव ने इस महामारी की गंभीरता को साफ तौर पर दिखाया था. दुनिया अभी कोरोना से उबर ही रही थी कि अमेरिका से कोरोना को लेकर एक खबर सामने आ रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में एक नया कोरोना एक नया रूप 'सिकाडा वैरिएंट' (BA.3.2) तेजी से फैल रहा है. इस नए स्ट्रेन के लक्षण और फैलने की रफ्तार ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को अलर्ट मोड पर डाल दिया है.
सीडीसी के अनुसार, बीए.3.2 अब तक अमेरिका के लगभग 25 राज्यों और दुनिया के 23 से अधिक देशों (जैसे डेनमार्क, जर्मनी और नीदरलैंड) में पाया जा चुका है. ग्लोबल लेवल पर इसका पहला मामला नवंबर 2024 में दक्षिण अफ्रीका में पाया गया था और वहीं सितंबर 2025 से मामलों में वृद्धि शुरू हुई थी.
यूएस के कम से कम आधे राज्यों में इसे वेस्टवॉटर सैंपल और ट्रैवलर टेस्टिंग के जरिए ट्रेस किया गया है जबकि कुल मामलों में इसकी हिस्सेदारी अभी बहुत कम है. कई प्रमुख राज्यों में अस्पतालों के अंदर मरीजों की संख्या में इजाफा देखा गया है. फ्लोरिडा, कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क जैसे राज्यों में स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है.
अमेरिका की वेबसाइट Gizmodo के मुताबिक, BA.3.2 यानी सिकाडा वैरिएं ओमिक्रॉन फैमिली का एक नया सब-वैरिएंट है जिसे सबसे पहले नवंबर 2024 में साउथ अफ्रीका में एक रेस्पिरेटरी सैंपल में पहचाना गया था. बाद में यह 2025 के दौरान अलग-अलग महाद्वीपों में फैला. इसमें 70-75 जेनेटिक म्यूटेशन पाए गए हैं जो इसे बाकी स्ट्रेन्स से काफी अलग बनाते हैं.
इस वैरिएंट में 70-75 जेनेटिक म्यूटेशन पाए गए हैं, जो इसे पिछले 'JN.1' वैरिएंट से काफी अलग बनाते हैं. यही कारण है कि वैज्ञानिक इसकी निगरानी कर रहे हैं।
CDC की रिपोर्ट के अनुसार कम से कम 22-23 देशों और अमेरिका के लगभग आधे राज्यों में मिल चुका है. इंडिपेंडेंट ने सीडीएस रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि 3 हवाई जहाज के अपशिष्ट जल के नमूनों और 20 से अधिक राज्यों से लिए गए 132 अपशिष्ट जल के नमूनों में भी इसका पता चला है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे फिलहाल निगरानी के घेरे में रहने वाला वैरिएंट (Variant Under Monitoring) की कैटेगरी में रखा है यानी इस पर कड़ी नजर रखी जा रही है लेकिन इसे अभी तक चिंता का विषय बनने वाला वैरिएंट (Variant of Concern) घोषित नहीं किया गया है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वैरिएंट उन लोगों को भी अपनी चपेट में ले रहा है जिन्हें वैक्सीन लग चुकी है. हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी तक मृत्यु दर में कोई बड़ा उछाल नहीं आया है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि सिकाडा पहले लंबे समय तक चुपचाप फैल रहा था और अब फिर से सामने आया है. शुरुआती स्टडीज इशारा करती हैं कि इसमें इम्युनिटी को कुछ हद तक चकमा देने की क्षमता हो सकती है लेकिन अब तक के डेटा में यह अधिक घातक या अस्पताल में भर्ती बढ़ाने वाला वैरिएंट साबित नहीं हुआ है.
बाल्टीमोर स्थित जॉन्स हॉपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के इंफेक्शन डिजीज डिपोर्टमेंट में वायरोलॉजिस्ट डॉ. एंड्रयू पेकोज का कहना है, 'मुझे लगता है कि बीए.3.2 ने अभी तक यह साबित नहीं किया है कि यह तत्काल खतरा है. लेकिन यह फैल रहा है और लगातार विकसित हो रहा है इसलिए इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि यह अपना रूप बदल सकता है और तेजी से फैलकर बीमार करने का खतरा पैदा कर सकता है.'
एक्सपर्ट्स का कहना है कि घबराने की नहीं बल्कि अलर्ट रहने की जरूरत है. भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क, हैंड हाइजीन और वैक्सीनेशन की डोज समय पर लेना अभी भी सबसे भरोसेमंद सुरक्षा कवच माने जा रहे हैं.
भारत में इसका कोई केस नहीं मिला है लेकिन इंटरनेशनल ट्रैवल को देखते हुए सतर्क रहना जरूरी है. डॉक्टर सलाह दे रहे हैं कि भीड़भाड़ वाली जगहों पर फिर से सावधानी बरतनी शुरू कर दी जाए.
शुरुआती जांच में पता चला है कि सिकाडा वैरिएंट के लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही हैं लेकिन यह शरीर को बहुत जल्दी थका देता है. मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, गले में खराश, लगातार खांसी और शरीर में तेज दर्द शामिल है. कुछ मरीजों में सांस लेने में दिक्कत और स्वाद-गंध जाने की समस्या भी दोबारा देखी जा रही है.
आजतक हेल्थ डेस्क