ओडिशा के बालासोर जिले में हुए भीषण रेल हादसे में अब तक कम से कम 278 लोग जान गंवा चुके हैं. दुर्घटना की जांच की कमान अब सीबीआई ने संभाल ली है.
सीबीआई जांच किसी निष्कर्ष पर पहुंचे, उससे पहले ही इस मामले में कई लोग मनगढ़ंत साजिश की बात कह रहे हैं. ऐसा ही एक पोस्ट सोशल मीडिया पर खूब वायरल है जिसमें कहा जा रहा है कि घटना के बाद से ही मोहम्मद शरीफ नाम का एक स्टेशन मास्टर फरार है.
स्टेशन कंट्रोल रूम में खड़े एक स्टेशन मास्टर जैसे दिख रहे शख्स की फोटो शेयर करते हुए कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि ये घटनास्थल बहानागा स्टेशन के स्टेशन मास्टर मोहम्मद शरीफ हैं. फोटो को शेयर करते हुए एक ट्विटर यूजर ने लिखा, 'अभी तक 300 से ज्यादा को मौत की नींद सुलाने वाला. और 900 से ज्यादा को गंभीर घायल करने वाला उड़ीसा का ट्रेन एक्सीडेंट जिस स्टेशन पर हुआ उसका नाम है. बहानागा स्टेशन. इस स्टेशन के स्टेशन मास्टर का नाम है मोहम्मद शरीफ अहमद. एक्सीडेंट की जांच के आदेश के बाद से ही फरार है."
ऐसे ही एक पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.
इंडिया टुडे फैक्ट चेक ने पाया कि वायरल तस्वीर में दिख रहे शख्स का ओडिशा ट्रेन एक्सीडेंट से कुछ लेना-देना नहीं है. बहानागा स्टेशन पर हादसे के वक्त जो अधिकारी तैनात थे उनका नाम एसबी मोहंती है. यहां ये बताना भी जरूरी है कि बहानागा बाजार स्टेशन में कोई भी मुस्लिम स्टेशन मास्टर कार्यरत नहीं है.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
वायरल पोस्ट में जिस बहानागा स्टेशन का जिक्र है, ये वही स्टेशन है जिसके पास कोरोमंडल एक्सप्रेस समेत दो और ट्रेनें भयानक हादसे का शिकार हो गई थीं. कीवर्ड सर्च करने पर हमें ऐसी कोई मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली जिसमें कहा गया हो कि हादसे के बाद से बहानागा स्टेशन पर कार्यरत मोहम्मद शरीफ नाम का कोई अधिकारी फरार है.
कलिंगा टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक बहानागा स्टेशन पर हादसे के वक्त असिस्टेंट स्टेशन मास्टर एसबी मोहंती तैनात थे.
आज तक को बहानागा स्टेशन पर तैनात अधिकारियों के नाम की लिस्ट मिली. इस लिस्ट में मोहम्मद शरीफ नाम के किसी अधिकारी का जिक्र नहीं है. इस लिस्ट के मुताबिक हादसे के वक्त एसके पटनायक स्टेशन मैनेजर थे और पीके पांडा, जेके नायक और एसबी मोहंती स्टेशन सुपरिंटेंडेंट थे.
आजतक से बातचीत में पटनायक ने बताया कि हादसे के वक्त ड्यूटी पर एसबी मोहंती तैनात थे. उन्होंने कहा, 'हादसे की जांच में शामिल होने के लिए मोहंती को खुर्दा रोड जंक्शन रेलवे स्टेशन भेज दिया गया है. हादसे के लिए मोहंती जिम्मेदार नहीं हैं और जांच के बाद ये बात साफ हो जाएगी.'
बहानागा बाजार स्टेशन सुपरिंटेंडेंट जेके नायक ने आजतक को बताया कि स्टेशन पर मोहम्मद शरीफ नाम का कोई भी अधिकारी कार्यरत नहीं है. नायक ने कहा, 'सब जांच में सहयोग कर रहे हैं, कोई भी अधिकारी फरार नहीं है. स्टेशन सुपरिंटेंडेंट एसबी मोहंती जो हादसे के वक्त तैनात थे, उन्हें पूछताछ के लिए खुर्दा भेज दिया गया है.'
वायरल तस्वीर की सच्चाई
वायरल ट्वीट के नीचे हमें ‘विकास चंदर’ नाम के शख्स का रिप्लाई मिला. इसमें उन्होंने मोहम्मद शरीफ नाम के अधिकारी के फरार होने वाले दावे का खंडन करते हुए उसे फेक न्यूज बताया. उन्होंने लिखा, 'ये तस्वीर मैंने साल 2003 में ली थी. ये तस्वीर बोर्रा गुहलु स्टेशन पर उस समय तैनात एक स्टेशन मास्टर की है, जो शायद अब रिटायर हो चुके होंगे.'
इस जानकारी की मदद से कीवर्ड सर्च करने पर हमें विकास चंदर के एक ब्लॉग में ये तस्वीर मिली. ये विकास का ट्रैवल ब्लॉग है, जिसमें उन्होंने कोठवलसा-किरंदुल (केके) रेलवे लाइन पर अपने ट्रेन के सफर की कुछ तस्वीरें और यादें शेयर की हैं. ब्लॉग पर दी गई जानकारी के मुताबिक ये फोटो उन्होंने अपने सफर के छठे दिन यानी छह मार्च, 2004 को ली थी. वेबपेज के सोर्स कोड में भी तस्वीर के अपलोड होने का समय जुलाई 2007 दिया है.
ओडिशा पुलिस ने चार जून को इस हादसे को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करने वालों को चेतावनी देते हुए एक ट्वीट भी किया था. पुलिस ने ट्वीट में लिखा, 'यह देखने में आया है कि सोशल मीडिया पर कुछ शरारती तत्व बालासोर में हुए दुखद ट्रेन हादसे को सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. जीआरपी, ओडिशा इस दुर्घटना के कारणों और अन्य सभी पहलुओं की जांच कर रही है.
हमने इस बारे में और जानकारी पाने के लिए विकास चंदर से संपर्क करने की कोशिश की. उनका जवाब आने पर उसे स्टोरी में अपडेट किया जाएगा.
विकास भदौरिया