सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक आदमी को कुछ लोग बेरहमी से पीटते नजर आ रहे हैं. वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स (एनआरसी) का समर्थन करने पर ममता बनर्जी के लोगों ने पश्चिम बंगाल के बशीरहाट में एक भाजपा कार्यकर्ता को बेरहमी से पीट दिया.
एक फेसबुक पेज ‘ ’ ने इस वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा है “NRC के पक्ष में बोलने पर भाजपा कार्यकर्ता की बशीरहाट, बंगाल में, ममता के जिहादियों ने जबरदस्त पिटाई कर दी. कब खत्म होगा बंगाल में जंगलराज?”
खबर लिखे जाने तक इस वीडियो को 1.51 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं और लगभग 35 सौ लोग शेयर कर चुके हैं. इसका आर्काइव्ड वर्जन देखा जा सकता है.
इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने अपनी पड़ताल में पाया कि वीडियो के साथ किया जा रहा दावा गलत है. वीडियो में हो रही मारपीट का एनआरसी के मुद्दे से कोई लेना-देना नहीं है.
दरअसल पश्चिम बंगाल के बारासात में अंदरूनी गुटबाजी के चलते बीजेपी के कुछ कार्यकर्ताओं ने अपनी ही पार्टी के एक पूर्व मंडल अध्यक्ष की पिटाई कर दी थी.
वायरल वीडियो को InVID टूल की मदद से रिवर्स सर्च करने पर हमें की ही एक खबर मिली जो 5 दिसंबर को टेलिकास्ट हुई थी. खबर में बताया गया कि बंगाल के नॉर्थ 24 परगना में बीजेपी की एक मीटिंग के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं के दो गुटों के बीच विवाद के चलते जमकर मारपीट हो गई थी.
आजतक संवाददाता की मदद से हमें पता चला कि वीडियो में पिट रहा शख्स भाजपा का एक पूर्व मंडल अध्यक्ष राजकुमार पाल है.
वायरल वीडियो की असलियत जानने के लिए हमने राजकुमार पाल से संपर्क किया. पाल ने हमें बताया कि बारासात में बीजेपी के मंडल अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर ये सारा विवाद हुआ था. उन्होनें दावा किया कि पार्टी में अंदरूनी गुटबाजी के चलते उनको कार्यकाल पूरा करने से पहले ही मंडल अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया था.
इसी का विरोध जताने जब वो 4 दिंसबर को बारासात के बीजेपी कार्यालय पहुंचे तो बीजेपी कार्यकर्ताओं ने ही उनसे मारपीट की. पाल ने उनसे की गई मारपीट का एनआरसी के मुद्दे से संबंध होने से साफ इनकार कर दिया.
उन्होनें पुष्टि के लिए हमें इस घटना को लेकर दर्ज कराई गई एफआईआर की कॉपी भी भेजी.
बांग्ला अखबार ने भी इस घटना पर खबर प्रकाशित की है. इस खबर में भी वीडियो में हो रही मारपीट को बीजेपी की अंदरूनी गुटबाजी का नतीजा बताया गया है.
इससे साफ है कि वायरल वीडियो में हो रही मारपीट का एनआरसी के मुद्दे से कोई लेना- देना नहीं है. यह वीडियो बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच अंदरूनी गुटबाजी के कारण हुई मारपीट का है.
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