फैक्ट चेक: AAP उम्मीदवार राघव चड्ढा के नाम पर वायरल बयान झूठा है

दक्षिण-पूर्व दिल्ली से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी राघव चड्ढा को लेकर एक पोस्ट वायरल हो रही है. जिसमें दावा किया जा रहा है कि चड्ढा ने कहा है कि अगर पंजाबी वोटर उनका साथ दें तो वे देहाती जाट-गुर्जरों और बिहारियों को धूल चटा देंगे. इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने की इस पोस्ट की पड़ताल..

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
राघव चड्ढा ने कहा कि पंजाबी वोटर साथ दें तो जाट-गुर्जर और बिहारियों को धूल चटा दूंगा.
सच्चाई
राघव के इस बयान की पुष्टि करती कोई न्यूज रिपोर्ट हमें नहीं मिली, वहीं राघव ने खुद भी इसका खंडन किया है.

अमनप्रीत कौर

  • नई दिल्ली,
  • 11 मई 2019,
  • अपडेटेड 7:23 PM IST

दक्षिण-पूर्व दिल्ली से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी राघव चड्ढा को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है. एक अखबार की क्लिपिंग के जरिए यह दावा किया जा रहा है कि चड्ढा ने कहा है कि अगर पंजाबी वोटर उनका साथ दें तो वे देहाती जाट-गुर्जरों और बिहारियों को धूल चटा देंगे.

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) को पड़ताल में राघव चड्ढा का सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई बयान नहीं मिला.

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वायरल पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.

फेसबुक और ट्विटर पर यह न्यूजपेपर क्लिपिंग तेजी से शेयर हो रही है. इसमें छपी खबर का शीर्षक है: "पंजाबी वोटर मेरा साथ दें तो देहाती जाट-गुर्जर और बिहारियों को धूल चाटा दूंगा- राघव चड्ढा". इस पूरी खबर के जरिए चड्ढा को जाट, गुर्जर और बिहार विरोधी दर्शाने की कोशिश की गई है.

वायरल बयान के बारे में जब हमने इंटरनेट पर खोज शुरू की तो हमें ऐसी कोई मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली जिससे चड्ढा के ऐसे बयान की पुष्टि हो. हालांकि हमें चड्ढा के आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट जरूर मिली, जिसमें उन्होंने खुद इस वायरल बयान का खंडन किया है. 11 मई को चड्ढा ने फेसबुक पोस्ट पर लिखा: "ये खबर बिल्कुल झूठी है, इस फोटोशॉप से बनाई न्यूज  पर विश्वास ना करें. यदि फेसबुक पर दिखे तो इसे तुरंत रिपोर्ट करें."

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वायरल पोस्ट की भाषा भी संदेहास्पद है. इस पोस्ट में कई गलतियां हैं जैसे खबर के शीर्षक में 'चटा' को 'चाटा' लिखा गया है. इसके अलावा भी पूरी खबर में बहुत सारी गलतियां हैं. आमतौर पर अखबार में इस तरह की गलतियों की गुंजाइश नहीं होती.

इस खबर के पैराग्राफ भी ढंग से अलाइन नहीं किए गए हैं. खबर जहां खत्म होती है वहां भी कुछ जगह खाली दिखाई देती है. अमूमन अखबार में इस तरह खबर खत्म होने के बाद जगह नहीं छोड़ी जाती. इतना ही नहीं, इस खबर पर न तो डेटलाइन है, न ही बाइलाइन है और न ही किसी एजेंसी का जिक्र है. अखबार में हर खबर के साथ या तो उसे लिखने वाले रिपोर्टर का नाम या फिर एजेंसी, ब्यूरो या किसी न किसी सोर्स का नाम होता है.

कुल मिलाकर पहली नजर में ही यह क्लिपिंग फर्जी लगती है, वहीं राघव ने खुद भी इस बयान का खंडन कर दिया है.

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