फैक्ट चेक: लद्दाख में शहीद जवानों के नाम पर नाइजीरियाई सैनिकों के शवों की तस्वीर वायरल

वायरल तस्वीर करीब पांच साल पुरानी है और नाइजीरिया के सैनिकों की है जो कि कथित तौर पर बोको हराम के हमले में मारे गए थे.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
लद्दाख में चीनी सेना के साथ हुई हिंसक झड़प में शहीद हुए भारतीय सैनिकों के शव.
सच्चाई
यह तस्वीर पांच साल पुरानी है और अफ्रीका में बोको हराम विद्रोहियों द्वारा मारे गए नाइजीरियाई सैनिकों की है.

चयन कुंडू

  • नई दिल्ली,
  • 20 जून 2020,
  • अपडेटेड 6:53 PM IST

लद्दाख की गलवान घाटी सीमा पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों की मौत के बाद सोशल मीडिया पर काफी हलचल है.

इसी बीच फेसबुक पर एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें जमीन पर कई सैनिकों के शव कतार में पड़े हुए हैं. दावा किया जा रहा है कि यह तस्वीर लद्दाख में शदीद हुए भारतीय सैनिकों की है.

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यूजर्स ने यह तस्वीर पोस्ट करते हुए कैप्शन में लिखा है, “लद्दाख से तस्वीर भारतीय सेना”. ने लिखा, “लद्दाख में हिंसक झड़प होने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी कहते हैं, 'हमारे सैनिकों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा'.”

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वायरल हो रही यह तस्वीर लद्दाख में चीन से टकराव में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की नहीं है. यह वायरल तस्वीर करीब पांच साल पुरानी है और नाइजीरिया के सैनिकों की है जो कि कथित तौर पर बोको हराम के हमले में मारे गए थे.

वायरल पोस्ट के आर्काइव वर्जन और देखे जा सकते हैं. कई फेसबुक यूजर्स ने यह तस्वीर यह सोचकर पोस्ट की है कि यह शहीद हुए भारतीय सैनिकों के शवों की तस्वीर है.

रिवर्स इमेज सर्च की मदद से हमने पाया कि यह तस्वीर इंटरनेट पर 2015 से ही वायरल है.

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2015 में इस तस्वीर को कुछ यूजर्स ने किया था और कुछ ने इसे पर इस दावे के साथ प्रकाशित किया था कि ये शव गायब हुए 105 नाइजीरियाई सैनिकों के हैं जो बोको हराम के हमले में मार दिए गए.

बाद में यह तस्वीर में भी हुई.

इन खबरों के मुताबिक, 2015 में नाइजीरिया में 105 सैनिकों के गायब होने पर विवाद उत्पन्न हुआ था. फिर अचानक सोशल मीडिया पर नाइजीरियाई सैनिकों के शवों की यह तस्वीर सामने आई. लोगों ने सरकार पर आरोप लगाया था कि ये सैनिक बोको हराम के हमले में मार दिए गए और सरकार इस तथ्य को छुपा रही है. बोको हराम पूर्वोत्तर नाइजीरिया में स्थित एक जिहादी आतंकवादी संगठन है, जो चाड, नाइजर और उत्तरी कैमरून में भी सक्रिय है.

स्पष्ट है कि इस वायरल तस्वीर का भारत और चीन के बीच मौजूदा संकट से कोई लेना-देना नहीं है.

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