प्रज्ञा ठाकुर पर भड़कीं स्वरा भास्कर, हिंदू आतंकवाद पर कही ये बातें

आजतक से खास बातचीत के दौरान स्वरा भास्कर ने सरकार, चुनाव, आतंकवाद और विकास समेत कई मुद्दों पर बात की. उन्होंने प्रज्ञा ठाकुर का जमकर विरोध किया.

स्वरा भास्कर
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 07 मई 2019,
  • अपडेटेड 7:40 AM IST

एक्ट्रेस स्वरा भास्कर पिछले कुछ समय से राजनीतिक मुद्दों पर काफी मुखरता के साथ अपनी राय रखती हुई नजर आती हैं. आजतक से खास बातचीत के दौरान उन्होंने सरकार, चुनाव, आतंकवाद और विकास समेत कई मुद्दों पर बात की. स्वरा भास्कर सीपीएम पार्टी का समर्थन कर रही हैं. हाल ही में उन्होंने राजस्थान के सीकर शहर में जनता को संबोधित किया था.

ये पूछे जाने पर कि हिंदू आतंकवाद नहीं हो सकता इस बारे में क्या कहेंगी? स्वरा ने कहा- जो लोग ये बात कर रहे हैं, मैं ये पूछना चाहूंगी कि उनकी नजर में नाथूराम गोडसे क्या थे? उन्होंने जिस विचार को सपोर्ट किया और जो उनकी हरकत थी वो क्या था. मेरा मानना है कि आतंकवाद पाप है, जुर्म है और वो सबसे घटिया किस्म की गद्दारी है. चाहे आप किसी भी देश से हों. अब मेरा ये कहना है कि अगर आप इस्लामिक टेरर शब्द इस्तेमाल कर रहे हैं तो किसी और भी धर्म की बात करेंगे.

दिग्विजय बेहतर विकल्प

मेरा मानना है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता है लेकिन आतंकवादी का धर्म होता है. आतंकवादी हिंदू, मुस्लिम, क्रिश्चन और बौद्धिस्ट हो सकते हैं. सारे आरोप एक जैसे नहीं होते. साध्वी प्रज्ञा देश के टुकड़े करना चाहती हैं. प्रज्ञा हिंदू आतंकवाद की आरोपी हैं. आतंकी हिंदू हमले में भी मरते हैं. मुझे लगता है कि दिग्विजय सिंह भोपाल के लिए सही नेता हैं. प्रज्ञा ठाकुर भोपाल के लिए ठीक नहीं है.

साध्वी प्रज्ञा पर साधा निशाना

स्वरा ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा- मैं एक हिंदू हूं. मेरी जो धार्मिक आस्था है उसे ठेस पहुंची है. आप अपने जुर्म छुपाने के लिए हिंदुत्व का ढोंग कर रही हैं. आप अपने जुर्म छुपाने के लिए मेरे भगवान का इस्तेमाल कर रही हैं. एक हिंदू होने के नाते मैं भोपाल के लोगों से कहूंगी कि आपकी आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. मैं तहेदिल से भोपाल के नागरिकों को कहना चाहूंगी कि अपने दिल पर हाथ रखिए और आपका वोट साध्वी प्रज्ञा को पड़ ही नहीं सकता है.

स्वरा भास्कर ने बातचीत का अंत करते हुए कहा कि ''भोपाल में एक कहावत है मैं उसी से अपनी बात खत्म करना चाहूंगी कि कहां राजा भोज और कहां ये फरेबी.''

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